मैदान पर दबदबा, बेखौफ शॉट्स और 1983 का इतिहास… जानें कैसे कपिल देव ने टीम इंडिया को दी नई उड़ान

कपिल देव न सिर्फ़ भारतीय क्रिकेट के महान ऑलराउंडर हैं, बल्कि उन्होंने टीम की सोच और आत्मविश्वास बदलने में भी अहम भूमिका निभाई। 1983 वर्ल्ड कप जीत के कप्तान, 5000+ रन और 434 विकेट्स के साथ उनका करियर निरंतरता और प्रेरणा का प्रतीक है।

Post Published By: Mrinal Pathak
Updated : 6 January 2026, 11:23 AM IST
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New Delhi: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम सिर्फ रिकॉर्ड के लिए नहीं, बल्कि सोच बदलने के लिए याद किए जाते हैं। ऐसे ही नाम हैं कपिल देव। मैदान पर कदम रखते ही उन्होंने यह संदेश दिया कि हालात चाहे जैसे भी हों, भारत जीत सकता है। उनका तेज़ रन-अप, उछलती गेंद, निडर शॉट और चेहरे पर हमेशा मुस्कान उन्हें भारतीय क्रिकेट का आइकन बनाती है। आज 6 जनवरी को वह अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं।

कैसे दिखाई टीमको नई राह?

उस समय भारत में तेज़ गेंदबाज़ी को लेकर संदेह था और विदेशी दौरों पर जीत असंभव मानी जाती थी। कपिल देव ने न केवल इस सोच को तोड़ा, बल्कि अपनी ऑलराउंड क्षमताओं से टीम को आत्मविश्वास भी दिया। वह सिर्फ विकेट लेने वाले गेंदबाज़ या रन बनाने वाले बल्लेबाज़ ही नहीं थे, बल्कि एक कप्तान थे जिन्होंने ड्रेसिंग रूम में जोश भर दिया। आज भारतीय क्रिकेट की सफलता की नींव उनके फलसफे लड़ने का, डरने का नहीं में है।

Kapil Dev birthday special

कपिल देव का जन्मदिन आज (Img: Internet)

कपिल देव के शानदार रिकॉर्ड्स

कपिल देव का जन्म 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़ में हुआ। आज 67 साल के होने के बावजूद उनका कद क्रिकेट जगत में अटल है। टेस्ट क्रिकेट में 4000 से ज़्यादा रन और 400 से ज़्यादा विकेट लेने वाले वह दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी हैं। कुल मिलाकर 5000 से अधिक रन, 8 शतक और 434 विकेट उनके नाम हैं। उनके प्रभाव का दायरा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने हर पिच और हर विपक्षी के खिलाफ भारत के लिए भरोसेमंद प्रदर्शन किया।

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1983 का साल बना यादगार

1980 में पाकिस्तान के खिलाफ चेन्नई में उनकी 84 रनों की पारी और 11 विकेट ने भारत को जीत दिलाई। 1981-82 में इंग्लैंड के खिलाफ 318 रन और 22 विकेट ने दिखाया कि एक खिलाड़ी पूरी सीरीज़ का रुख बदल सकता है। और फिर आया 1983 का वर्ल्ड कप, जिसमें उनकी कप्तानी में भारत ने वेस्ट इंडीज़ को हराकर इतिहास रच दिया। यह जीत सिर्फ़ ट्रॉफी के लिए नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट में आत्मविश्वास जगाने के लिए थी।

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युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा

कपिल देव की ताकत उनकी निरंतरता थी। अगर उन्हें 1984-85 में अनुशासनहीनता के कारण एक टेस्ट से बाहर नहीं किया गया होता, तो उनके लगातार 132 टेस्ट मैच होते। 67 साल की उम्र में वह केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। उनका नाम हमेशा भारतीय क्रिकेट की जुझारू और हार न मानने वाली भावना के साथ जुड़ा रहेगा।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 6 January 2026, 11:23 AM IST

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