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भारत के कई मंदिरों में देवी-देवताओं को पिज्जा, बर्गर, सैंडविच और कोल्ड ड्रिंक का भोग लगाया जाता है। जानें राजकोट के जीविका माताजी मंदिर और चेन्नई के जय दुर्गा पीठम मंदिर की अनोखी परंपरा, भोग का महत्व और इसके पीछे की मान्यता।
मंदिरों में देवी को चढ़ता है पिज्जा-बर्गर
New Delhi: भारत विविधताओं का देश है, जहां धर्म और आस्था के अनगिनत रूप देखने को मिलते हैं। आमतौर पर मंदिरों में देवी-देवताओं को लड्डू, पेड़ा, खीर, फल या मेवे का भोग लगाया जाता है, लेकिन देश में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जहां प्रसाद के रूप में पिज्जा, बर्गर, सैंडविच, पानीपुरी और कोल्ड ड्रिंक चढ़ाई जाती हैं। भले ही यह सुनकर अजीब लगे, लेकिन भक्त इसे देवी की अनूठी लीला और बदलते समय के साथ जुड़ी आस्था का प्रतीक मानते हैं।
ऐसे यूनिक भोग की परंपरा रखने वाले मंदिरों में दो प्रमुख नाम हैं गुजरात के राजकोट रापूताना में जीविका माताजी मंदिर और तमिलनाडु, चेन्नई के पड़प्पाई स्थित जय दुर्गा पीठम मंदिर।
राजकोट के रापूताना में स्थित जीविका माताजी का मंदिर लगभग 65–70 वर्ष पुराना है। यहां भक्त विशेष रूप से अपने बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना के साथ आते हैं।
मंदिर के आचार्य बताते हैं कि पहले पारंपरिक रूप से केवल नारियल और साकार प्रसाद ही चढ़ाया जाता था। लेकिन समय के साथ बच्चों को ध्यान में रखते हुए प्रसाद में नए आइटम जोड़े गए। अब भक्त बर्गर, पिज्जा, सैंडविच, पानीपुरी और अन्य फास्ट फूड अर्पित करते हैं।
इसके पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण यह है कि मंदिर को मिलने वाला दान सामाजिक कार्यों में उपयोग किया जाता है। श्रद्धालु स्वयं प्रसाद और भोजन भेजते हैं ताकि बच्चों के लिए यह दिन खास बन सके।
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तमिलनाडु के पड़प्पाई क्षेत्र में स्थित जय दुर्गा पीठम मंदिर भी अपने मॉडर्न प्रसाद के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना हर्बल ऑन्कॉलॉजिस्ट डॉ. के. श्री श्रीधर ने की। यहां पर भक्त देवी दुर्गा को पिज्जा, बर्गर, सैंडविच और विभिन्न फास्ट फूड items का भोग लगाते हैं।
मंदिर के प्रबंधन के अनुसार, प्रसाद को मॉडर्नाइज करने का उद्देश्य युवा पीढ़ी को धर्म और भक्ति से जोड़ना है। यही वजह है कि यहां दूर-दूर से श्रद्धालु और टूरिस्ट आते हैं।
मंदिर की एक अनोखी परंपरा यह भी है कि भक्त अपनी जन्मतिथि रजिस्टर करा सकते हैं। जन्मदिन पर उन्हें विशेष केक प्रसाद दिया जाता है, जिसे पूर्ण रूप से पवित्र विधि से तैयार किया जाता है।
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साथ ही मंदिर में चढ़ाया जाने वाला हर प्रकार का प्रसाद FSSAI से प्रमाणित होता है, ताकि भक्तों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन प्राप्त हो सके।
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