10 अगस्त को दोहरा फल देने वाला महासंयोग! सुबह श्री हरि तो शाम को शिव की कृपा, जानें इस शुभ दिन पर क्या करें और क्या न करें?

सावन के दूसरे सोमवार (10 अगस्त 2026) पर बन रहा है दुर्लभ महासंयोग! एक ही दिन कामिका एकादशी पारण और सोम प्रदोष व्रत का अवसर। जानिए सुबह श्री हरि और शाम को भगवान शिव की पूजा का सही समय और इस शुभ दिन में क्या करनें से बचे

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 9 August 2026, 10:28 AM IST
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New Delhi: वर्ष 2026 में सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास और फलदायी साबित होने जा रहा है। 10 अगस्त 2026 को सावन का दूसरा सोमवार है, लेकिन यह दिन केवल सोमवार व्रत तक सीमित नहीं रहेगा।

इस दिन एक ऐसा दुर्लभ आध्यात्मिक संयोग बन रहा है, जहां सुबह भगवान विष्णु (श्री हरि) का आशीर्वाद मिलेगा और शाम को भगवान शिव (हर) की कृपा बरसेगी। एक ही दिन कामिका एकादशी का पारण, सावन सोमवार व्रत और सोम प्रदोष का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। आइए ऐसे में जानते हैं कि इस शुभ दिन में क्या करें और क्या नहीं

सुबह कामिका एकादशी पारण का सही समय

9 अगस्त को कामिका एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 10 अगस्त की सुबह अपना व्रत खोलेंगे। पंचांग के अनुसार एकादशी पारण का शुभ समय सुबह 5:37 बजे से सुबह 8:00 बजे तक रहेगा। इस दौरान स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें, उन्हें तुलसी दल अर्पित करें और फिर सात्विक आहार या जल ग्रहण कर पारण करें। पारण के तुरंत बाद सुबह करीब 8:00 बजे से त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा।

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शाम को सोम प्रदोष व्रत और शिव पूजा मुहूर्त

सोमवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने से यह बेहद फलदायी 'सोम प्रदोष व्रत' बन जाता है। सावन सोमवार और सोम प्रदोष का एक साथ आना शिव कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। इस दिन शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष विधान है। 10 अगस्त की शाम 7:03 बजे से रात 9:11 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम समय रहेगा।

सावन सोमवार व प्रदोष व्रत में क्या करें और क्या न करें?

क्या करें?: सावन सोमवार और सोम प्रदोष के इस दुर्लभ महासंयोग पर सुबह स्नान के बाद सात्विक आहार से एकादशी का पारण करें। दिनभर मन को शांत रखें और 'ॐ नमः शिवाय' व 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्रों का जाप करते रहें। शाम को प्रदोष काल में पुनः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिवलिंग पर जल, दूध व बेलपत्र अर्पित कर शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करें। इस दिन भूखे व ज़रूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

क्या न करें? : व्रत के पावन दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचें। पूजा के दौरान मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार, गुस्सा, विवाद या निंदा न आने दें। शिवलिंग पर जल या अभिषेक चढ़ाते समय ध्यान रखें कि शिवजी को कभी भी केतकी का फूल, हल्दी, रोली या तुलसी पत्र अर्पित न करें। इसके अलावा, एकादशी पारण के तुरंत बाद भारी या तला-भुना खाना खाने से भी बचें।

इस अद्भुत संयोग में कैसे करें पूजा?

शाम के समय स्वच्छ वस्त्र धारण कर शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध और दही से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल चढ़ाएं। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हरि और हर दोनों का पूजन करने से जीवन के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Location :  New Delhi

Published :  9 August 2026, 10:28 AM IST

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