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फाल्गुन महीना भक्ति, रंग और उत्सव का संगम है। महाशिवरात्रि, फुलेरा दूज, होलिका दहन और होली जैसे बड़े पर्व इसी महीने आते हैं। जानिए फाल्गुन के प्रमुख त्योहारों का महत्व और क्यों यह महीना सबसे खास माना जाता है।
फाल्गुन वर्ष
New Delhi: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन वर्ष का अंतिम महीना होता है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इसे सबसे ऊर्जावान और उत्सवपूर्ण समय माना जाता है। सर्दी के विदा होने और वसंत ऋतु के आगमन के साथ यह महीना जीवन में नई उमंग, उल्लास और सकारात्मकता लेकर आता है। फाल्गुन में कई बड़े पर्व मनाए जाते हैं, जिनका संबंध भक्ति, प्रेम और सामाजिक मेल-जोल से जुड़ा होता है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। यह भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। आज के दौर में यह पर्व “मेंटल पीस नाइट” के रूप में भी देखा जाने लगा है।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया को फुलेरा दूज मनाई जाती है। यह दिन राधा-कृष्ण को समर्पित होता है। खास बात यह है कि इस दिन विवाह और अन्य शुभ कार्यों पर कोई रोक नहीं होती। इसलिए इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। उत्तर भारत में इस दिन मंदिरों और घरों में फूलों की सजावट की जाती है और होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है। यह पर्व प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा है, जो यह संदेश देता है कि सत्य और भक्ति की हमेशा जीत होती है। लोग इस रात अग्नि प्रज्वलित कर नकारात्मकता को त्यागने और नए जीवन की शुरुआत का संकल्प लेते हैं।
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होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी यानी होली मनाई जाती है। यह पर्व रंगों, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। देश के अलग-अलग हिस्सों में होली अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है, लेकिन इसका मूल भाव आपसी भाईचारा और खुशी बांटना ही होता है।
बंगाल और ओडिशा में फाल्गुन पूर्णिमा को डोलोत्सव या डोल पूर्णिमा मनाई जाती है, जहां राधा-कृष्ण की झांकी और झूला उत्सव का आयोजन होता है। वहीं बरसाना और नंदगांव की लठमार होली देश-विदेश में अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं।
फाल्गुन महीना सर्दी के अंत और वसंत के आगमन का संकेत देता है। यह भक्ति और उत्सव का सुंदर मेल है, जहां एक ओर साधना और ध्यान है तो दूसरी ओर रंग, संगीत और सामाजिक मेल-जोल। यही कारण है कि फाल्गुन को सकारात्मक ऊर्जा और नए आरंभ का महीना कहा जाता है।