Dhanteras Tradition: धनतेरस पर सिर्फ खरीदारी नहीं, इस एक परंपरा को भूल गए तो अधूरा रह जाएगा त्योहार

धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। जानें घर के बाहर किस दिशा में दीपक जलाते हैं, कौन-सा तेल इस्तेमाल होता है और यम दीपदान के पीछे की पौराणिक कथा क्या है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 2 November 2026, 4:28 PM IST
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New Delhi: धनतेरस पर सोना-चांदी और नए बर्तन खरीदने की परंपरा तो लगभग हर कोई जानता है, लेकिन इस दिन एक खास धार्मिक परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि धनतेरस की शाम घर के बाहर यमराज के नाम दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। आइए ऐसे में जानते हैं यम दीपदान का महत्व, इससे जुड़ी पौराणिक कथा और 2026 में दीपक जलाने का समय

धनतेरस पर क्यों किया जाता है यम दीपदान?

धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के साथ यमराज के लिए दीपदान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाया जाता है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।

परंपरा के मुताबिक, मिट्टी के दीपक में सरसों या तिल का तेल डालकर उसे घर के बाहर रखा जाता है। इस दीपदान के माध्यम से परिवार के लोगों की अच्छी सेहत, लंबी उम्र और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इसे करने की विधि में अंतर हो सकता है।

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राजा हिमा के पुत्र से जुड़ी है यम दीपदान की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा हिमा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग बताया गया था। जब उसकी पत्नी को इस बात का पता चला तो उसने पति की जान बचाने के लिए घर के दरवाजे पर दीपक जलाए और सोने-चांदी के आभूषणों का ढेर लगा दिया। इसके बाद वह पूरी रात जागकर गीत और कहानियां सुनाती रही।

यम दीपदान (Img- Dynamite News)

कथा के मुताबिक जब यमराज सर्प के रूप में वहां पहुंचे तो दीपकों की रोशनी और आभूषणों की चमक से उनका ध्यान भटक गया। सुबह होने पर वे राजकुमार के प्राण लिए बिना लौट गए। इसी कथा को यम दीपदान की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। यह धार्मिक मान्यता पर आधारित पौराणिक कथा है।

धनतेरस 2026 पर कब जलाएं यम दीपक?

साल 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्यास्त शाम 5:33 बजे होगा। यम दीपदान के लिए प्रदोष काल शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में घर के बाहर दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है।

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धनतेरस पर खरीदारी के साथ यम दीपदान की परंपरा भी इस पर्व का हिस्सा है। इसलिए इस दिन बाजार जाने और पूजा की तैयारी करने के साथ शाम के दीपदान को भी याद रखा जाता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का पालन व्यक्तिगत आस्था का विषय है।

Location :  New Delhi

Published :  2 November 2026, 4:28 PM IST

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