Ahoi Ashtami Significance: संतान की लंबी उम्र के लिए क्यों खास है यह व्रत, जानिए अहोई माता की पूरी कथा

Ahoi Ashtami 2026 का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। जानिए कौन हैं अहोई माता, साही के बच्चों से जुड़ी पौराणिक कथा, पूजा का महत्व और संतान की दीर्घायु के लिए इस व्रत से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 31 October 2026, 10:15 AM IST
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New Delhi: हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। यह व्रत करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद आता है। इस साल अहोई अष्टमी 1 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। मान्यता के अनुसार, इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इसके बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

कौन हैं अहोई माता?

अहोई माता को मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे संतान की रक्षा करने वाली देवी हैं। उन्हें स्याहु माता के नाम से भी जाना जाता है। माताएं उनकी पूजा करके बच्चों की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।

मान्यता है कि अहोई माता की कृपा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसी विश्वास के कारण यह व्रत माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

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साही के बच्चों से जुड़ी है पौराणिक कथा

अहोई अष्टमी की पूजा के पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा सुनाई जाती है। कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक महिला खेत में मिट्टी खोद रही थी। इसी दौरान उससे अनजाने में साही के बच्चों की मृत्यु हो गई।

करवा चौथ के चार दिन बाद रखा जाता है यह व्रत

इस घटना से महिला बहुत दुखी हुई और उसने अपनी गलती के लिए माता पार्वती से क्षमा मांगी। उसकी प्रार्थना और तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने उसे संतान की सुरक्षा का आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि माता ने जिस स्वरूप में दर्शन दिए, उसी की पूजा अहोई माता के रूप में होने लगी।

कैसा होता है अहोई माता का स्वरूप?

अहोई माता का चित्र पूजा के दौरान दीवार पर गेरू से बनाया जाता है या कागज पर बने चित्र का इस्तेमाल किया जाता है। उनके चित्र में आठ कोनों वाली आकृति बनाई जाती है। इसके साथ साही और उसके बच्चों की आकृतियां भी दिखाई जाती हैं।

कुछ चित्रों में सूर्य और चंद्रमा का चित्रण भी होता है। इन आकृतियों का संबंध अहोई माता की पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है। व्रती महिलाएं पूजा के समय इसी चित्र के सामने दीपक जलाकर माता का स्मरण करती हैं।

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संतान की दीर्घायु के लिए क्यों खास है व्रत?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत रखने से अहोई माता संतान को लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद देती हैं। महिलाएं अपने बच्चों की खुशहाली और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं।

कुछ मान्यताओं में निःसंतान महिलाओं के लिए भी इस व्रत को संतान सुख की कामना से जुड़ा बताया गया है। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाएं और परंपराएं हैं। अहोई अष्टमी का पर्व मातृत्व, संतान के प्रति प्रेम और परिवार की मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  31 October 2026, 10:15 AM IST

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