Festival: शरद पूर्णिमा आज, खीर कब रखें और सुबह कितने बजे निकालें? जानें जरूरी बातें

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर खीर कब रखें और सुबह कितने बजे निकालें? जानें चंद्रोदय का समय, मां लक्ष्मी की कोजागरी पूजा का मुहूर्त, खीर रखने की धार्मिक मान्यता और प्रसाद को सुरक्षित रखने के जरूरी उपाय।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 25 October 2026, 9:59 AM IST
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New Delhi: शरद पूर्णिमा आज यानी 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जा रही है। इस दिन घरों में दूध और चावल से खीर बनाने और उसे चांदनी में रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि आश्विन मास की पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान गुणों वाली होती हैं। इसी विश्वास के साथ लोग रात में खीर को चांदनी में रखते हैं और सुबह भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

चंद्रोदय के बाद रखें खीर

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने के लिए चंद्रमा निकलने के बाद का समय चुना जाता है। दी गई पंचांग जानकारी के अनुसार, पूर्णिमा तिथि आज 25 अक्टूबर को सुबह करीब 11:55 बजे शुरू हुई है और 26 अक्टूबर को सुबह करीब 9:41 बजे तक रहेगी। दिल्ली में आज चंद्रोदय शाम करीब 5 बजे होने का अनुमान है। ऐसे में खीर पहले से तैयार करके चंद्रमा निकलने के बाद चांदनी में रख सकते हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर संभव है।

क्या आधी रात तक इंतजार करना जरूरी है?

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने के लिए आधी रात तक इंतजार करना जरूरी नहीं है। चंद्रोदय के बाद खीर चांदनी में रखने की परंपरा निभाई जा सकती है। वहीं, मां लक्ष्मी की कोजागरी पूजा का मुहूर्त अलग माना जाता है। दी गई जानकारी के मुताबिक, आज रात निशीथ काल करीब 11:40 बजे से 12:31 बजे तक है। यह पूजा का समय है, खीर रखने का अनिवार्य समय नहीं। पूजा का समय अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित रहेगा।

Sharad Purnima 2026

खीर रखते समय न करें गलती (Img- Pinterest)

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सुबह कितने बजे निकालें शरद पूर्णिमा की खीर?

कई परिवारों में शरद पूर्णिमा की रात खीर रखकर सुबह स्नान और पूजा के बाद निकाली जाती है। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया जाता है। हालांकि, खीर निकालने के लिए सुबह का कोई एक समय सभी परंपराओं में अनिवार्य नहीं है। आप अपने घर की पूजा-विधि और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसे निकाल सकते हैं।

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा क्यों?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा में होता है और उसकी किरणों को अमृतमयी माना जाता है। इसी विश्वास के कारण दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखने की परंपरा चली आ रही है। ब्रज क्षेत्र में इस दिन को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है और इसे भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से जोड़कर देखा जाता है।

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खीर रखते समय इन बातों का रखें ध्यान

खीर को चांदनी में रखने से पहले सामान्य तापमान तक ठंडा करें और साफ, ढके हुए बर्तन का इस्तेमाल करें। दूध से बनी खीर को पूरी रात कमरे के तापमान पर छोड़ना सुरक्षित नहीं है। बेहतर है कि खीर को फ्रिज में रखें और सुबह पूजा के लिए थोड़ी मात्रा निकालें। इस तरह धार्मिक परंपरा निभाने के साथ भोजन की स्वच्छता और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  25 October 2026, 9:59 AM IST

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