चित्रकूट में दिखी बुंदेलखंड लोक संस्कृति की अनूठी परंपरा, हर्षोल्लास से मनाया गया ठेडीया पर्व

बुंदेलखंड की मिट्टी में आज भी ऐसी लोकपरंपराएं जीवंत हैं, जो गांवों की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को खास बनाती हैं। चित्रकूट की कर्वी तहसील स्थित ग्राम सभा मकरी पहरा में शनिवार को बुंदेली परंपरा से जुड़ा ठेडीया पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस आयोजन ने ग्रामीण जीवन में रची-बसी लोकसंस्कृति की खूबसूरत झलक पेश की।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 25 October 2026, 6:37 AM IST
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Chitrakoot: बुंदेलखंड की मिट्टी में रची-बसी लोकपरंपराएं आज भी ग्रामीण अंचलों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। इसी लोकसंस्कृति की अनूठी झलक कर्वी तहसील क्षेत्र की ग्राम सभा मकरी पहरा में देखने को मिली, जहां शनिवार को बुंदेली ग्रामीण परंपरा से जुड़े ठेडीया पर्व को हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया।

इस दौरान पारंपरिक रस्मों के साथ कबड्डी का आयोजन भी हुआ, जिसमें बच्चियों और किशोरियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

मिट्टी के पात्र में दीपक जलाकर निभाई गई परंपरा

पर्व में छोटी बच्चियों से लेकर बड़ी लड़कियों तक ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ठेडीया पर्व की रस्म में मिट्टी के विशेष पात्र में दीपक जलाया जाता है और उसके अंदर चोकर डाला जाता है। पात्र के बीच में दीपक रखकर उसे प्रज्ज्वलित किया जाता है।

ग्रामीण मान्यता के अनुसार इसी दीपक के माध्यम से लड़कों और बुजुर्गों की नजर उतारी जाती है। नजर उतारने की परंपरागत रस्म पूरी होने के बाद उस पात्र को तोड़ दिया जाता है।

कबड्डी में बालिकाओं ने दिखाया दमखम

इसके बाद गांव की बच्चियों और किशोरियों ने कबड्डी खेल में हिस्सा लेकर आयोजन में और रंग भर दिया। कबड्डी के दौरान बालिकाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। अलग-अलग टोलियों में खेली गई कबड्डी में लड़कियों ने पूरे जोश के साथ अपना दमखम दिखाया।

खेल के दौरान बच्चियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। पर्व में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ खेलकूद का समावेश ग्रामीण जीवन की जीवंतता को दर्शाता नजर आया। इससे आयोजन में शामिल बालिकाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिला।

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लोकसंस्कृति और आपसी मेल-जोल का प्रतीक है पर्व

ग्रामीणों का कहना है कि ठेडीया पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि गांव की पुरानी बुंदेली संस्कृति और आपसी मेल-जोल की पहचान है। आधुनिकता के दौर में भी मकरी पहरा की बेटियां इस परंपरा को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही हैं। पर्व के दौरान गांव में खुशी और उत्साह का माहौल रहा तथा ग्रामीणों ने मिलकर लोकपरंपरा को जीवंत बनाए रखा।

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आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बावजूद मकरी पहरा की बेटियां इस परंपरा को उत्साहपूर्वक आगे बढ़ा रही हैं। पर्व के दौरान गांव में खुशी और उमंग का माहौल रहा। ग्रामीणों ने मिलकर पारंपरिक रस्मों और खेल गतिविधियों के जरिए अपनी लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा।

Location :  Chitrakoot

Published :  25 October 2026, 6:30 AM IST

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