हिंदी
दशहरे पर इस गांव में होती है रावण की पूजा (Image: dynamite news)
Chitrakoot News: दशहरे पर देशभर में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक गांव ऐसा भी है, जहां रावण को जलाने के बजाय उसकी पूजा की जाती है। यहां रावण की विशाल प्रतिमा के सामने लोग सिर झुकाते हैं और शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले उसका आशीर्वाद लेते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यह परंपरा करीब 250 साल पुरानी है। रावण को लेकर गांव की यह अनोखी मान्यता हर साल दशहरे पर लोगों का ध्यान खींचती है।
चित्रकूट जिले के रैपुरा गांव में रावण की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। ग्रामीण दशहरे के अलावा दूसरे पर्वों और शुभ अवसरों पर भी प्रतिमा की पूजा-अर्चना करते हैं। गांव के लोगों के लिए रावण केवल रामायण का एक प्रमुख पात्र नहीं, बल्कि महान विद्वान और ज्ञान का प्रतीक भी है। ग्रामीणों की मान्यता है कि रावण चारों वेदों और छह शास्त्रों का ज्ञाता था। इसी वजह से उसकी विद्वता का सम्मान किया जाता है। गांव में रावण की पूजा की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है।
दशहरे के दिन रैपुरा गांव में रामलीला का आयोजन किया जाता है। यहां भी राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन होता है और रामलीला में रावण का वध किया जाता है। हालांकि, देश के दूसरे हिस्सों की तरह रावण के पुतले का दहन नहीं होता। इसके बजाय ग्रामीण रावण की प्रतिमा के सामने पूजा-अर्चना करते हैं। यही परंपरा इस गांव को दशहरे के दौरान चर्चा में ले आती है। जहां आमतौर पर रावण दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, वहीं रैपुरा में उसकी विद्वता और ज्ञान को सम्मान देने की परंपरा निभाई जाती है।
गांव के प्रधान जगदीश पटेल के मुताबिक, रैपुरा में रावण की पूजा की परंपरा लगभग 250 साल पुरानी है। उन्होंने बताया कि वह खुद भी किसी शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले रावण की पूजा करते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि रावण के आशीर्वाद से गांव के कई युवाओं ने पढ़ाई में सफलता हासिल की और IAS, PCS समेत विभिन्न सरकारी सेवाओं में जगह बनाई। हालांकि, यह ग्रामीणों की आस्था और मान्यता है।
दशहरे पर रैपुरा गांव की परंपरा भारतीय लोक आस्थाओं की विविधता को सामने लाती है। यहां रावण के चरित्र को केवल उसके अंत या बुराई के प्रतीक के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि उसकी विद्वता को भी याद किया जाता है। यही वजह है कि करीब ढाई सौ साल से चली आ रही इस परंपरा के तहत गांव में रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा की जाती है। दशहरे के मौके पर रैपुरा की यह अनोखी मान्यता लोगों के बीच उत्सुकता पैदा करती है।
Location : Chitrakoot
Published : 20 October 2026, 2:50 PM IST