क्या आपको पता है: रावण ने मरने से पहले लक्ष्मण को बताए थे ये 4 राज, कितने तीर लगने के बाद हुआ था लंकापति का अंत?

रावण के दस सिरों का रहस्य क्या था? लक्ष्मण को दिए गए आखिरी उपदेश, रावण की विद्वता, नाभि में अमृत की कथा और 31 बाणों से जुड़े प्रचलित विवरण के बारे में जानिए....

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 20 October 2026, 6:35 PM IST
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Greater Noida: रावण का नाम आते ही एक ऐसे राजा की तस्वीर सामने आती है, जिसके पास अपार शक्ति, अद्भुत ज्ञान और सोने की लंका जैसी समृद्ध नगरी थी। वह शिवभक्त था, वेदों का ज्ञाता था और शास्त्रों के साथ शस्त्र विद्या में भी पारंगत माना जाता था। लेकिन इतना सब होने के बावजूद उसका अंत हुआ। आखिर रावण की सबसे बड़ी गलतियां क्या थीं? उसके दस सिर किस बात का प्रतीक माने जाते हैं और भगवान राम ने कितने बाण चलाकर उसका वध किया था? आइए, जानें रावण से जुड़ी इन रोचक मान्यताओं और धार्मिक कथाओं के बारे में।

1. पहली बात: शुभ कार्य को जितना जल्दी हो सके कर डालना चाहिये और अशुभ कार्य को जितना टाला जा सके टाल देना चाहिए यानि शुभस्य शीघ्रम्।

2. दूसरी बात: अपने शत्रु को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए। मैं यह भूल कर गया, मैंने जिन्हें साधारण वानर और भालू समझा उन्होंने मेरी पूरी सेना को ख़त्म कर दिया। मैंने जब ब्रह्माजी से अमरता का वरदान माँगा था तब मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा वध नहीं कर सके ऐसा कहा था। मैं मनुष्य और वानर को तुच्छ समझता था यह मेरी गलती थी।

3. तीसरी बात: अपने जीवन का कोई राज हो तो उसे किसी को नहीं बताना चाहिए। यहाँ भी मैं गलती कर गया क्योंकि विभीषण मेरी मृत्यु का राज जानता था ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी।

4. रावण का आखिरी उपदेश था कि किसी भी पराई स्त्री पर बुरी नजर नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति पराई स्त्री पर बुरी नजर रखता है वह नष्ट हो जाता है।

रावण के 10 सिर

रावण के 10 सिरों की एक और व्याख्या 10 भावनाएँ हैं। वे भावनाएँ हैं: काम (वासना), क्रोध (क्रोध), मोह (भ्रम), लोभ (लालच), मद (अभिमान), मात्सर्य (ईर्ष्या), मानस (मन), बुद्धि (बुद्धि), चित (इच्छा), और अहंकार (अहंकार)।

महान विद्वान और सबसे बुद्धिमान व्यक्तियों में से एक था रावण

रावण के दस सिर छह शास्त्रों (हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ जिनमें चार श्रेणियां हैं: श्रुति, स्मृति, पुराण और तंत्र) और चार वेदों का प्रतीक हैं, जिनमें रावण ने महारत हासिल की, जिससे वह एक महान विद्वान और उस समय के सबसे बुद्धिमान व्यक्तियों में से एक बन गया। वह 64 प्रकार के ज्ञान और सभी प्रकार के शस्त्र विद्याओं में पारंगत था। उसे प्रासंगिक संगीतमय स्वरों (नोटों) के साथ वेदों को संकलित करने के लिए जाना जाता है और उसका शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला अब तक का सबसे लोकप्रिय भजन है।

कैसे हुआ रावण का अंत

श्री राम ने रावण का वध एक दिव्य अस्त्र से किया, जो रावण को भगवान ब्रह्मा ने दिया था। हनुमान जी लंका से रावण का यह अस्त्र लेकर आए थे और विभीषण ने राम जी से कहा था कि रावण की नाभि पर वार करने से ही उसका वध होगा, क्योंकि रावण की नाभि में अमृत है। तब भगवान राम ने रावण की नाभि पर बाण चलाया, जिससे रावण का अंत हो गया। त्रेता युग में आश्विन शुक्ल की दशमी तिथि को राम ने उसका वध किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है।

रावण की मृत्यु कितने बाणों के बाद हुई?

श्री रामचरितमानस के अनुसार भगवान राम ने रावण को मारने के लिए 31 बाण चलाए थे। इन 31 बाणों में से 1 बाण रावण की नाभि पर लगा, 10 बाणों ने उसके 10 सिर काट दिए और 20 बाणों ने उसके हाथ धड़ से अलग कर दिए। ऐसा कहा जाता है कि जब रावण का विशाल धड़ धरती पर गिरा तो धरती हिलने लगी थी।

Location :  Greater Noida

Published :  20 October 2026, 6:27 PM IST

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