VIP का काफिला है जनाब! जब सिस्टम की कीमत एक अजन्मे बच्चे ने चुकाई… बंद रास्तों ने उजाड़ दी एक मां की कोख

अमृतसर में सीएम यात्रा के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन और बंद रास्तों ने एक गर्भवती महिला की जिंदगी बदल दी। अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण मां ने गर्भ में पल रहे बच्चे को खो दिया। यह घटना बताती है कि वीआईपी सिस्टम में सबसे ज्यादा पिसता आम नागरिक ही है।

Updated : 10 May 2026, 2:58 PM IST
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Chandigarh: पंजाब के अमृतसर से सामने आई यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां सत्ता की आवाजाही के आगे आम इंसान की सांसें भी छोटी पड़ जाती हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान की यात्रा और उससे जुड़े ट्रैफिक डायवर्जन के बीच एक गर्भवती महिला समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी और उसने अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को खो दिया।

यह खबर सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां के उस टूटे सपने की कहानी है, जो कुछ घंटों बाद अपने बच्चे को गोद में लेने की उम्मीद कर रही थी। लेकिन सिस्टम ने उससे वह अधिकार भी छीन लिया।

जब सड़कें बंद थीं और दर्द बढ़ रहा था

पीड़िता के पति जुगराज सिंह के मुताबिक उनकी पत्नी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। वे उसे तुरंत अमृतसर के श्रीगुरु अमरदास अस्पताल लेकर निकल पड़े। लेकिन शहर की सड़कें उस दिन आम लोगों के लिए नहीं थीं। मुख्यमंत्री की यात्रा के चलते जगह-जगह पुलिस बैरिकेडिंग थी, रास्ते बंद थे और ट्रैफिक डायवर्ट किया गया था।

एक पति अपनी पत्नी की चीखें सुनता रहा, लेकिन रास्ता नहीं खुला। एंबुलेंस की जगह निजी वाहन था और हर मोड़ पर इंतजार। करीब 40 से 50 मिनट तक वे सड़कों पर भटकते रहे। अस्पताल पहुंचने तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी है।

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सोचिए, एक मां जिसने नौ महीने तक अपने बच्चे की धड़कन महसूस की हो, वह अस्पताल के बेड पर यह सुने कि उसका बच्चा अब इस दुनिया में नहीं रहा- सिर्फ इसलिए क्योंकि सत्ता का काफिला गुजर रहा था।

क्या वीआईपी मूवमेंट इंसानी जिंदगी से बड़ा है?

यह सवाल नया नहीं है। देश में अक्सर वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक रोक दिया जाता है। आम लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। लेकिन जब इस व्यवस्था की कीमत किसी की जान बन जाए तब यह सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं रह जाता, बल्कि संवेदनहीनता बन जाता है।

एक तरफ सरकारें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और 'जनसेवा' की बातें करती हैं, दूसरी तरफ अस्पताल पहुंचने का रास्ता ही बंद हो जाता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान इमरजेंसी मेडिकल रूट भी सुरक्षित नहीं रह सकता, तो फिर आम नागरिक किस पर भरोसा करे?

मां और बच्चे का रिश्ता… जो सड़क पर हार गया

एक मां अपने बच्चे को जन्म देने से पहले ही उससे जुड़ जाती है। उसकी हर धड़कन में बच्चे का भविष्य बसता है। लेकिन अमृतसर की इस मां के हिस्से में मातृत्व की खुशी नहीं, बल्कि एक ऐसा खालीपन आया है जिसे शायद कभी भरा नहीं जा सकेगा।

यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं है। यह उस आम नागरिक का दर्द है जो हर बार सिस्टम के नीचे दब जाता है। नेता आते-जाते रहेंगे, काफिले निकलते रहेंगे, लेकिन उस मां की सूनी गोद हमेशा यह सवाल पूछेगी कि आखिर उसकी क्या गलती थी?

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व्यवस्था पर उठते सवाल

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। लेकिन असली जरूरत राजनीति नहीं जवाबदेही की है।

क्या भविष्य में वीआईपी मूवमेंट के दौरान मेडिकल इमरजेंसी के लिए अलग व्यवस्था होगी? क्या प्रशासन इस परिवार को सिर्फ संवेदना देगा या अपनी गलती स्वीकार भी करेगा? क्योंकि अगर सड़कें सत्ता के लिए खुलें और जिंदगी के लिए बंद हों, तो यह लोकतंत्र नहीं, व्यवस्था की विफलता कहलाएगी।

Location :  Chandigarh

Published :  10 May 2026, 2:56 PM IST

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