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उमाशंकर सिंह (IMG: Pinterest)
Lucknow: सियासत की चमक के पीछे कई बार संघर्ष की ऐसी कहानी छिपी होती है, जिसे दुनिया देर से जानती है। कुर्सी, चुनाव और बड़े राजनीतिक कद की तस्वीर तो सब देखते हैं, लेकिन उस सफर में साथ चलने वाले उन चेहरों को कम ही लोग याद रखते हैं, जिन्होंने मुश्किल वक्त में नेता का हाथ थामे रखा। दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह की राजनीतिक कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज जब उनके राजनीतिक सफर और जनसेवा को याद किया जा रहा है, तो उनके साथ हर मोर्चे पर खड़े रहने वाले पांच पुराने साथी भी चर्चा में हैं। इन्हें उनके करीबियों के बीच उमाशंकर सिंह के 'पांच पांडव' के तौर पर याद किया जाता है।
राजनीति में किसी मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं होता। खासकर तब, जब शुरुआत सीमित संसाधनों और छोटी सी पहचान से हो। उमाशंकर सिंह के शुरुआती राजनीतिक सफर का दौर भी संघर्षों से भरा हुआ बताया जाता है। उस समय न आज जैसी पहचान थी और न ही राजनीतिक प्रभाव इतना बड़ा था। ऐसे में गांव-गांव पहुंचना, लोगों से मिलना, उनकी समस्याओं को सुनना और अपने लिए भरोसा बनाना ही सबसे बड़ी चुनौती थी।
यही वह दौर था, जब चन्द्रकेश सिंह, सचिन्द्र सिंह, अजय शर्मा, ओमप्रकाश और सुल्तान लगातार उमाशंकर सिंह के साथ खड़े दिखाई देते थे। इन साथियों ने सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रमों में मौजूदगी नहीं दर्ज कराई, बल्कि उनके संघर्ष को करीब से जिया। दिन हो या रात, गांव का रास्ता हो या लोगों के बीच बैठकर बातचीत करनी हो, इन साथियों की मौजूदगी अक्सर उनके साथ रहती थी।
उमाशंकर सिंह के शुरुआती राजनीतिक जीवन में चन्द्रकेश सिंह और सचिन्द्र सिंह की भूमिका खास मानी जाती है। बताया जाता है कि संघर्ष के उस दौर में दोनों उनके साथ लगातार सक्रिय रहे। राजनीतिक रास्ते में जब मुश्किलें आईं तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय उमाशंकर सिंह का मनोबल बढ़ाया।
इन पांच साथियों में अजय शर्मा का नाम भी बेहद अहम माना जाता है। उमाशंकर सिंह के शुरुआती दौर के करीबी सहयोगियों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। जनसंपर्क अभियान हो या संगठन से जुड़ा कोई काम, अजय शर्मा कई मौकों पर उनके साथ दिखाई देते थे।
उमाशंकर सिंह के संघर्ष के दिनों की चर्चा होती है तो उनके पुराने सफर और कमांडर एम्बेसडर कार का जिक्र भी सामने आता है। ओमप्रकाश और सुल्तान उन साथियों में शामिल थे, जो इस सफर का लगातार हिस्सा बने रहे। संसाधन सीमित थे, लेकिन हौसले में कोई कमी नहीं थी। एक साथ निकलना, गांवों में पहुंचना, लोगों से मिलना और देर रात तक जनसंपर्क करना उस समय की दिनचर्या का हिस्सा हुआ करता था। आज जब राजनीति का तरीका काफी बदल चुका है, उस दौर की यह तस्वीर किसी संघर्ष की कहानी जैसी लगती है।
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उमाशंकर सिंह की पहचान धीरे-धीरे मजबूत होती गई। जनसंपर्क बढ़ा तो लोगों के बीच पकड़ भी मजबूत होने लगी। उनकी राजनीतिक सक्रियता ने उन्हें एक बड़े जनप्रतिनिधि के तौर पर स्थापित किया। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की राह में कई साल का संघर्ष शामिल था। इन पांच साथियों ने उस संघर्ष को बेहद करीब से देखा था। उनके लिए उमाशंकर सिंह सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वह साथी थे, जिनके साथ उन्होंने शुरुआती दिनों की मुश्किलें साझा की थीं।
उमाशंकर सिंह की राजनीतिक यात्रा को अगर सिर्फ उनके चुनावी प्रदर्शन, विधायक बनने या जनप्रिय नेता के तौर पर देखा जाए तो कहानी का एक बड़ा हिस्सा छूट जाता है। उनकी शुरुआती यात्रा में साथ रहे चन्द्रकेश सिंह, सचिन्द्र सिंह, अजय शर्मा, ओमप्रकाश और सुल्तान उस कहानी के ऐसे किरदार हैं, जिनका योगदान पर्दे के पीछे रहा।
Location : Lucknow
Published : 8 August 2026, 1:04 PM IST