200 करोड़ का CSR घोटाला: ईडी ने किया PSU और बैंकों की मिलीभगत से चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का पर्दाफाश

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 200 करोड़ रुपये के CSR फंड घोटाले का भंडाफोड़ किया है। तीन दशकों से फर्जी डॉक्टर बनकर चैरिटी की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले इस रैकेट में 40 PSU और सरकारी बैंक शामिल हैं।

Updated : 7 October 2026, 11:28 AM IST
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New Delhi: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश के कॉर्पोरेट जगत और वित्तीय तंत्र को हिला देने वाले एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग और रिश्वत रैकेट का खुलासा किया है। कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का दायरा करीब 200 करोड़ रुपये तक फैला हुआ है। इस पूरे खेल में कई जाने-माने कॉर्पोरेट घराने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU), सरकारी बैंक और एक फर्जी डॉक्टर की मिलीभगत सामने आई है, जिसने टैक्स-फ्री चैरिटी के नाम पर इस पूरे साम्राज्य को खड़ा किया था।

फर्जी डॉक्टर का काला कारोबार, तीन दशकों से चल रहा था खेल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे रैकेट के केंद्र में धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव नाम का एक शख्स है, जो पिछले करीब 30 वर्षों से फर्जी डॉक्टर बनकर लोगों को धोखा दे रहा था। इस फर्जी डॉक्टर ने मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम देने के लिए कई चैरिटेबल ट्रस्ट बना रखे थे। इन ट्रस्टों के जरिए वह कॉर्पोरेट घरानों से CSR डोनेशन लिया करता था।

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रैकेट का यह खेल बेहद शातिर तरीके से काम करता था। कॉर्पोरेट घरानों से मिलने वाले CSR फंड में से अपना भारी-भरकम कमीशन काटने के बाद, बाकी की बची हुई रकम को कैश के रूप में मूल योगदानकर्ता (डोनेट करने वाले) को वापस लौटा दिया जाता था। इस तरह, हिसाब-किताब वाले सफेद धन को बिना हिसाब-किताब के काले धन (कैश) में बदलने का यह एक बड़ा जरिया बन चुका था।

40 PSU और सरकारी बैंकों की संलिप्तता, अधिकारियों को दी जाती थी घूस

ईडी की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि देश भर के कम से कम 40 PSU और पब्लिक सेक्टर बैंकों ने इस आरोपी द्वारा संचालित ट्रस्टों को आँख मूँदकर CSR डोनेशन जारी किए थे। इन सरकारी उद्यमों से आसानी से फंड मंजूर कराने के लिए PSU के बड़े और जिम्मेदार अधिकारियों को भारी-भरकम रिश्वत दी जाती थी।

अब खुलासे में सामने आया कि कई प्रोजेक्ट्स या तो कागजों पर ही अधूरे छोड़ दिए गए या फिर उन्हें मिले फंड के अनुपात में बहुत कम काम कराया गया। इसके अलावा, वेंडर के बिलों को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता था, ताकि अतिरिक्त पैसों को फर्जी और शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए इधर-उधर घुमाया जा सके।

चार राज्यों में छापेमारी और 21 लाख रुपये नकद बरामद

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद, केंद्रीय एजेंसी ने 1 अक्टूबर को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR समेत कुल आठ ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान ईडी के हाथ कई अहम सबूत और वित्तीय ट्रांजैक्शन के दस्तावेज लगे हैं। साथ ही, छापेमारी में 21 लाख रुपये की अघोषित नकदी भी बरामद की गई है।

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जांच में एजेंटों और बिचौलियों के एक ऐसे सक्रिय नेटवर्क का भी पता चला है, जो कॉर्पोरेट घरानों के CSR फंड को इन फर्जी ट्रस्टों तक पहुंचाने का काम करते थे। इसके बाद इन पैसों को बाजार के ऑपरेटरों द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाया जाता था। इनमें से अधिकांश शेल कंपनियां पहले से ही विभिन्न जीएसटी (GST) धोखाधड़ी के मामलों में जांच के घेरे में हैं। फिलहाल, प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे रैकेट की गहराई से छानबीन कर रहा है और इसमें शामिल अन्य चेहरों की पहचान की जा रही है।

Location :  New Delhi

Published :  7 October 2026, 11:28 AM IST

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