हरियाणा में रिटायरमेंट के बाद भी बरकरार रहता है रुतबा, जानें पूर्व IAS अफसरों के पुनर्वास का पूरा सच

हरियाणा में रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ आईएएस अफसरों को आयोगों व प्राधिकरणों में नई जिम्मेदारियां मिलने का ट्रेंड जारी है। डीएस ढेसी, राजेश खुल्लर से लेकर टीवीएसएन प्रसाद तक कई नाम इसमें शामिल हैं। जानिए प्रशासनिक हलकों की पूरी खबर।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 7 October 2026, 12:12 PM IST
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Chandigarh: हरियाणा के प्रशासनिक हलकों में एक कहावत बेहद मशहूर है यहां आईएएस कभी रिटायर नहीं होता, सिर्फ उसका पद बदल जाता है।" राज्य में सालों से यह परंपरा चली आ रही है कि सेवानिवृत्त होते ही वरिष्ठ नौकरशाहों को विभिन्न आयोगों, प्राधिकरणों और संवैधानिक संस्थाओं में शीर्ष पदों पर बैठा दिया जाता है। इस पुनर्वास के साथ ही पूर्व अफसरों को भारी-भरकम वेतन, सरकारी गाड़ी और आलीशान कोठी जैसी सभी वीआईपी सुविधाएं लगातार मिलती रहती हैं।

हुड्डा शासन से शुरू हुआ सिलसिला, आज भी जारी

प्रशासनिक अधिकारियों के पुनर्वास का यह दौर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल के दौरान रफ्तार पकड़ा था। उनके 10 साल के शासनकाल में कम से कम छह सेवानिवृत्त मुख्य सचिवों को महत्वपूर्ण पदों पर एडजस्ट किया गया था। बाद में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार ने भी इस परंपरा को जारी रखा।

पूर्व मुख्य सचिव डीएस ढेसी को पहले बिजली नियामक आयोग का चेयरमैन और फिर मुख्यमंत्री का मुख्य प्रधान सचिव बनाया गया। वहीं आईपीएस आरके पचनंदा को एचपीएससी और वाईपी सिंगला को सूचना आयोग की कमान सौंपी गई थी।

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मौजूदा व्यवस्था में भी कायम है पूर्व अफसरों का जलवा

वर्तमान प्रशासनिक तंत्र में भी पूर्व आईएएस अधिकारियों का दबदबा पूरी तरह कायम है। पूर्व आईएएस राजेश खुल्लर इस समय मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव का अहम पद संभाल रहे हैं। पूर्व मुख्य सचिव संजीव कौशल को सातवें वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उनके बाद मुख्य सचिव रहे टीवीएसएन प्रसाद हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त पद पर तैनात हैं। इसके अलावा समीर पाल सरो, अंकुर गुप्ता, ललित सिवाच और सुमेधा कटारिया जैसे कई पूर्व अधिकारी अलग-अलग प्राधिकरणों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

अशोक खेमका जैसे चर्चित नाम रहे इस ट्रेंड से दूर

हालांकि, हर अधिकारी को सेवानिवृत्ति के बाद यह अवसर नहीं मिलता। राज्य के सबसे चर्चित और ईमानदार छवि वाले पूर्व आईएएस अशोक खेमका पिछले साल रिटायर हुए, लेकिन उन्हें कोई पद नहीं मिला। बताया जाता है कि उन्होंने खुद भी इसके लिए कोई आवेदन नहीं किया था। इसी तरह दो महीने पहले रिटायर हुए डॉ. राजशेखर वुंडरू को भी अब तक कोई नया पद नहीं सौंपा गया है।

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47 अफसरों की किल्लत, सेवारत अफसरों पर बढ़ा कामकाज का बोझ

एक तरफ जहां पूर्व अफसरों को नए पद दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में सेवारत आईएएस अधिकारियों की भारी कमी बनी हुई है। हरियाणा में आईएएस के कुल 226 स्वीकृत पदों के मुकाबले महज 179 अफसर ही कार्यरत हैं, यानी 47 पद खाली पड़े हैं।

इनमें से भी एक दर्जन से अधिक अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं। इस वजह से एक-एक अधिकारी को 3 से 4 विभागों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे फैसलों में देरी और प्रशासनिक कार्यकुशलता पर असर पड़ रहा है।

Location :  Chandigarh

Published :  7 October 2026, 12:12 PM IST

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