अखिलेश यादव के सामने भिड़े दो सपा नेता, गुस्से में बैठक से निकले अखिलेश; फिर हुआ बड़ा फैसला

लखनऊ में समाजवादी पार्टी की बैठक के दौरान एटा और कासगंज के दो नेताओं के बीच विवाद हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई तीखी बहस के बाद सपा प्रमुख बैठक से चले गए। इसके करीब एक घंटे बाद एटा-कासगंज की जिला कार्यकारिणियां और फ्रंटल संगठन भंग कर दिए गए। अब दोनों जिलों में नए संगठन के गठन पर नजर है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 21 September 2026, 1:48 PM IST
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Lucknow/Etah: समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में शनिवार को हुई एक बैठक अचानक विवाद और तीखी बहस का अखाड़ा बन गई। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक में एटा-कासगंज के नेताओं के बीच ऐसा विवाद हुआ कि मामला पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने तक पहुंच गया। बताया गया कि दो नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक के बाद गाली-गलौज तक की स्थिति बन गई। अखिलेश यादव इस घटनाक्रम से नाराज होकर बैठक से चले गए। इसके करीब एक घंटे बाद पार्टी ने एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणियों के साथ दोनों जिलों के फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया।

बुलाई गई थी अहम बैठक

सपा नेतृत्व ने एटा और कासगंज के नेताओं को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में बैठक के लिए बुलाया था। बैठक का मकसद दोनों जिलों में संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और पिछले चुनावों के प्रदर्शन को लेकर फीडबैक लेना था। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में दोनों जिलों के करीब 250 वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद थे। अखिलेश यादव भी बैठक में पहुंचे और नेताओं से संगठन तथा चुनावी तैयारियों को लेकर जानकारी ली।

फीडबैक देते-देते दो नेताओं में शुरू हुई बहस

रिपोर्टों के मुताबिक, सपा नेता मंजीत यादव बैठक में एटा-कासगंज में पार्टी की स्थिति और चुनावी नतीजों को लेकर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव भी बोलने लगे। दोनों के बीच किसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई। इसके बाद बहस तेज हो गई और मामला गाली-गलौज तक पहुंच गया। बैठक में मौजूद दूसरे नेताओं ने माहौल शांत कराने की कोशिश की, लेकिन विवाद ने पार्टी नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

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दोनों जिलों की इकाइयां भंग

बैठक खत्म होने के कुछ ही समय बाद सपा ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया। एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणियों को भंग कर दिया गया। इसके साथ ही दोनों जिलों के सभी फ्रंटल संगठनों को भी समाप्त कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों जिलों के जिलाध्यक्षों को भी पद से हटा दिया गया। इसके अलावा एटा और कासगंज से प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारियों और सदस्यों को भी पदमुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

बैठक के दौरान अखिलेश यादव की नाराजगी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। अलग-अलग रिपोर्टों में उनके बयान को अलग-अलग शब्दों में रिपोर्ट किया गया है। कुछ रिपोर्टों में उनके हवाले से बताया गया कि उन्होंने पार्टी अनुशासन का पालन करने की बात कही और ऐसे व्यवहार को स्वीकार नहीं करने का संदेश दिया। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अखिलेश यादव ने विवाद को पैसे के प्रभाव से जोड़ते हुए टिप्पणी की।

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पार्टी हित में लिया गया फैसला

एटा के निवर्तमान सपा जिलाध्यक्ष परवेज जुबैरी ने पार्टी नेतृत्व के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने जो निर्णय लिया है, वह सोच-समझकर पार्टी हित में लिया गया है। उनके मुताबिक, इस फैसले से यह संदेश गया है कि पार्टी में कोई व्यक्ति कितना भी करीबी क्यों न हो, संगठन में अनुशासन जरूरी है और सभी कार्यकर्ताओं की बात सुनी जानी चाहिए।

अब नए संगठन के गठन पर नजर

एटा और कासगंज की जिला इकाइयां भंग होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों जिलों में नई कार्यकारिणी कब बनेगी और संगठन की कमान किसे सौंपी जाएगी। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच यह फैसला सपा के स्थानीय संगठन के लिए महत्वपूर्ण है। एटा में विधानसभा की चार सीटें हैं और हालिया विधानसभा चुनाव में इन सभी पर भाजपा के उम्मीदवार जीते थे।

Location :  Lucknow/Etah

Published :  21 September 2026, 1:48 PM IST

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