Rajya Sabha Election: सामाजिक, राजनीतिक और सांगठनिक समीकरण के तहत बीजेपी ने उतारे प्रत्याशी

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। सूची में कई नए चेहरे हैं, जबकि मौजूदा सदस्यों को दोबारा मौका नहीं मिला।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 6 October 2026, 9:34 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव सिर्फ उच्च सदन की खाली सीटें भरने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर ऐसे संकेत दिए हैं कि चयन में संगठन, सामाजिक समीकरण और आने वाले विधानसभा चुनाव, तीनों को साथ रखा गया है। यूपी में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है।

आठ नाम, लेकिन संदेश कई

भाजपा ने इस बार धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि पार्टी ने इस चुनाव में अपने किसी भी मौजूदा राज्यसभा सदस्य को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा जैसे नाम भी सूची में नहीं हैं।

यही बदलाव इस सूची को सामान्य टिकट बंटवारे से अलग बनाता है। पार्टी ने कई ऐसे नेताओं को मौका दिया है, जिनकी पहचान संगठन और जमीनी राजनीति से जुड़ी रही है। धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, जबकि प्रकाश पाल भाजपा के ओबीसी मोर्चे से जुड़े रहे हैं। राम प्रताप सिंह चौहान पार्टी संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

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जातीय समीकरण पर भी नजर

आठ उम्मीदवारों की सूची में सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन भी दिखाई देता है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक इसमें तीन ओबीसी, दो दलित और तीन सामान्य वर्ग के चेहरे शामिल हैं। दो महिला उम्मीदवारों, प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को भी जगह मिली है।

राजनीतिक विश्लेषण में इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के सामने एक तरफ अपने पारंपरिक समर्थक वर्गों को साथ रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ ओबीसी और दलित समुदायों के बीच प्रतिनिधित्व का संदेश देने की जरूरत भी है।

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धर्मपाल सिंह के चयन ने खींचा ध्यान

सूची में धर्मपाल सिंह का नाम खास तौर पर चर्चा में है। वह कई बार विधायक रह चुके हैं और मौजूदा समय में प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। उनका चयन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लोधी समाज से जुड़े राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा के साथ किसी खास सामाजिक समूह को साधने की वजह अलग से नहीं बताई है। वहीं श्रुति गंगवार का नाम भी महत्वपूर्ण है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं। 

2027 की तैयारी का संकेत?

ताजा राजनीतिक रिपोर्टों में उम्मीदवारों के चयन को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा गया है। फिलहाल इतना साफ है कि भाजपा ने इस बार सिर्फ दिल्ली भेजने के लिए नाम तय नहीं किए, बल्कि संगठन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया है।

Location :  Lucknow

Published :  6 October 2026, 9:10 AM IST

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