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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर चल रहा घमासान अब धीरे-धीरे साफ होने लगा है। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के ताजा बयान और सरकार की चुप्पी से यही संकेत मिल रहे हैं कि चुनाव फिलहाल टल चुके हैं और अब इनका असर सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव तक रह सकता है।
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Img: Internet)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की हवा अब खामोश नजर आने लगी है। जहां पहले चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई थी, वहीं अब कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान और सरकार की चुप्पी ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वोटिंग की घड़ी नहीं है। राजधानी लखनऊ में भी यही सवाल गूंज रहा है, आखिर चुनाव टल रहे हैं और क्यों?
राजभर के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सरकार फिलहाल चुनाव कराने के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं हैं। उनके बयान से ये भी स्पष्ट हुआ कि चुनाव चाहे अभी हों या विधानसभा चुनाव के बाद, सत्ता पक्ष का भरोसा अपनी जीत पर बरकरार है।
पंचायत चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल हमेशा यही रहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बारे में क्या सोचते हैं। ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में इस पर अपनी बात रखी और खुलासा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से विस्तार से बातचीत की है।
राजभर ने कहा कि मुख्यमंत्री का मानना है कि मामला फिलहाल हाईकोर्ट में है और सरकार पूरी तरह कोर्ट के फैसले का सम्मान करेगी। यानी कोर्ट जो भी बताएगा, उसी के अनुसार आगे बढ़ेंगे। राजभर के अनुसार मुख्यमंत्री और उनकी टीम फिलहाल चुनाव कराने में जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने ये भी संकेत दिए कि चुनाव चाहे अभी हों या विधानसभा चुनाव के बाद, सत्ता पक्ष की स्थिति मजबूत बनी रहेगी।
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उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारियों में इस सवाल का जवाब बहुत साफ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष यानी समाजवादी पार्टी भी फिलहाल इन चुनावों को टालने में ही रुचि रखता है। मुख्य वजह है- अंदरूनी बगावत का डर। पंचायत चुनावों के समय गांव-गांव में टिकट को लेकर मतभेद और आपसी लड़ाइयां भड़क सकती हैं और विधानसभा चुनाव अब महज 10-11 महीने दूर हैं। इस वजह से दोनों प्रमुख पार्टियां फिलहाल चुनाव में कोई दबाव नहीं डाल रही हैं।
राजभर ने साफ किया कि मुख्यमंत्री के विचारों के मुताबिक, अदालत का फैसला अंतिम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अदालत में अपनी मजबूरियां भी साझा की हैं, जैसे कि अधिकारियों की व्यस्तता और संसाधनों की कमी। राजभर के मुताबिक, चुनाव की टलने की वजह से सत्ता पक्ष को कोई डर नहीं है। उनकी सोच है कि चाहे चुनाव अभी हों या विधानसभा चुनाव के बाद, जीत उनकी ही होगी।