हिंदी
मिडिल ईस्ट के हालातों पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार ने संसद में सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में अमित शाह, राजनाथ सिंह, एस जयशंकर और विपक्ष के कई अन्य नेता मौजूद रहे। कुछ विपक्षी दल इस बैठक में शामिल हुए। तृणमूल कांग्रेस ने बैठक का बहिष्कार किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह (Img: Google)
New Delhi: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने राजनीतिक एकजुटता दिखाने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में बुधवार शाम राजधानी में सर्वदलीय बैठक शुरू हुई। जहां सरकार ने साफ संकेत दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दों पर सभी दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई जा रही है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह बैठक बेहद मानी जा रही है। जिसमें देश की सुरक्षा और कूटनीतिक दिशा पर मंथन हो रहा है।
बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी बैठक में शामिल हुए हैं। सरकार इस बैठक के जरिए सभी दलों को हालात की पूरी जानकारी देने और एक साझा रुख बनाने की कोशिश कर रही है।
बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री विस्तृत प्रस्तुति दे रहे हैं। इसमें पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, भारत के रणनीतिक हित और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी जा रही है। खास तौर पर वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संभावित खतरों पर भी चर्चा केंद्र में है।
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की ओर से कांग्रेस के तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और बीजद के सस्मित पात्रा शामिल हुए हैं। वहीं जेडीयू से ललन सिंह और संजय झा भी बैठक में पहुंचे हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इस बैठक से दूरी बनाई है और राहुल गांधी भी इसमें शामिल नहीं हुए हैं। जिससे राजनीतिक हलकों में अलग-अलग संकेत निकाले जा रहे हैं।