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रोजाना खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाला तेल सेहत पर गहरा असर डालता है। कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, भारतीय रसोई के लिए घी, सरसों, नारियल, तिल और मूंगफली का तेल सबसे बेहतर विकल्प हैं। ये तेल हाई हीट कुकिंग के लिए सुरक्षित हैं और दिल की सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाते। सही मात्रा और संतुलन के साथ देसी तेल महंगे ऑलिव ऑयल का बेहतर विकल्प हो सकते हैं।


भारतीय रसोई में रोज बनने वाली सब्ज़ियों का स्वाद और सेहत काफी हद तक इस्तेमाल होने वाले तेल पर निर्भर करता है। अक्सर लोग सेहत के नाम पर महंगे ऑलिव ऑयल या विदेशी विकल्पों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि भारतीय खानपान के लिए देसी तेल अधिक उपयुक्त माने जाते हैं। सही तेल न केवल भोजन को पौष्टिक बनाता है, बल्कि दिल की बीमारियों से बचाव में भी अहम भूमिका निभाता है। (Img: Google)



कार्डियोलॉजिस्ट और फंक्शनल मेडिसिन एक्सपर्ट के अनुसार, सभी कुकिंग ऑयल सेहत के लिए समान नहीं होते। भारतीय खाने की प्रकृति, तेज आंच, मसालों का भरपूर उपयोग और लंबे समय तक पकाने की प्रक्रिया के हिसाब से तेल का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि रिफाइंड और प्रोसेस्ड तेलों का ज्यादा सेवन लंबे समय में हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकता है। (Img: Google)



सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो में भारतीय रसोई के लिए पांच बेहतरीन तेलों का उल्लेख किया गया है। इनमें घी, नारियल तेल, सरसों का तेल, तिल का तेल और मूंगफली का तेल शामिल हैं। ये तेल पारंपरिक रूप से भारत में इस्तेमाल होते आए हैं और वैज्ञानिक दृष्टि से भी इनके फायदे साबित हैं। इनमें मौजूद हेल्दी फैट्स शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ दिल को भी सुरक्षित रखते हैं। (Img: Google)



भारतीय भोजन अक्सर तेज आंच पर पकाया जाता है। ऐसे में वही तेल सुरक्षित माने जाते हैं जिनका स्मोक पॉइंट अधिक हो और जो गर्म होने पर अपने पोषक तत्व न खोएं। घी और सरसों का तेल इस लिहाज से बेहतरीन विकल्प हैं। वहीं नारियल और तिल का तेल एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं, जो सूजन कम करने और मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद करते हैं। (Img: Google)



एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेहतमंद रहने के लिए तेल का चुनाव जितना जरूरी है, उतनी ही जरूरी उसकी मात्रा भी है। किसी एक तेल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तेलों को संतुलित रूप से इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। महंगे विदेशी तेलों के बजाय देसी और पारंपरिक तेल अगर सीमित मात्रा में उपयोग किए जाएं, तो ये स्वाद और सेहत दोनों के लिए आदर्श साबित हो सकते हैं। (Img: Google)
