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इस राज्य में सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करने की तैयारी में है। ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर आधारित यह कदम बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।


राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम उठाते हुए मंत्रियों का एक समूह (GoM) गठित किया है। इस समूह की अध्यक्षता सूचना और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश कर रहे हैं। समूह का उद्देश्य मौजूदा कानूनों की समीक्षा करना और यह समझना है कि सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर किस तरह प्रभाव डाल रहा है। (Img- Internet)



GoM का एक अहम एजेंडा गलत सूचना, फेक न्यूज और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक लगाना है। बीते कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण और मानसिक तनाव से जुड़े मामलों में तेजी आई है, जिसे देखते हुए सरकार इसे सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक समस्या के रूप में देख रही है। (Img- Internet)



सूचना एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश का कहना है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे ऑनलाइन कंटेंट को पूरी तरह समझने और सही-गलत का निर्णय लेने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में एल्गोरिदम आधारित कंटेंट और रील कल्चर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। सरकार का मानना है कि डिजिटल स्वतंत्रता से पहले डिजिटल सुरक्षा जरूरी है। (Img- Internet)



हालांकि सोशल मीडिया को विनियमित करने का अधिकार मुख्य रूप से केंद्र सरकार के पास है, लेकिन आंध्र प्रदेश सरकार राज्य स्तर पर विशेष कानून लाने की संभावना भी टटोल रही है। GoM द्वारा तैयार की जाने वाली गाइडलाइंस को पहले केंद्र सरकार के साथ साझा किया जाएगा, ताकि इसे राष्ट्रीय नीति से जोड़ा जा सके। (Img- Internet)



गृह मंत्री वांगलापुड़ी अनीता ने बताया कि बच्चों के साथ होने वाले डिजिटल दुर्व्यवहार और उनके व्यवहार में आ रहे बदलावों का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए एक एनजीओ को भी जोड़ा गया है, जो सोशल मीडिया के कारण बच्चों में बढ़ रही चिड़चिड़ाहट, ध्यान की कमी और सामाजिक अलगाव जैसे पहलुओं पर रिसर्च कर रहा है। (Img- Internet)



सरकार का यह कदम केवल सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं है। नए एंगल के तौर पर डिजिटल साक्षरता, पैरेंटल कंट्रोल और एज-वेरिफिकेशन जैसे उपायों पर भी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि भविष्य में स्कूलों के पाठ्यक्रम में डिजिटल व्यवहार से जुड़ी शिक्षा भी जोड़ी जा सकती है। (Img- Internet)
