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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे ने यूपी की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा और नितिन नवीन से होने वाली मुलाकातों को मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सीएम योगी आदित्यनाथ (Img: Google)
New Delhi: उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तेज गतिविधियों का केंद्र बन गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरे को लेकर राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चर्चाओं का दौर जारी है।
ऐसा माना जा रहा है कि प्रदेश में लंबे समय से अटके मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल को लेकर अब निर्णायक बातचीत हो सकती है। सीएम योगी आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करेंगे।
मुख्यमंत्री योगी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने वाली बैठक को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मुलाकात में उत्तर प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति, कानून-व्यवस्था की स्थिति और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा संभव है। इसके साथ ही आगामी राजनीतिक रणनीति, खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी विचार-विमर्श होने की अटकलें हैं। पीएम मोदी और सीएम योगी की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भाजपा संगठन राज्यों में अपनी रणनीति को और धार देने में जुटा है।
योगी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं। फिलहाल यूपी कैबिनेट में कई मंत्री पद खाली हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नए चेहरों को मौका देने और कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर पार्टी नेतृत्व गंभीर मंथन कर रहा है। खास बात यह है कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी इन दिनों दिल्ली में मौजूद हैं, जिससे अटकलों को और बल मिला है। ब्रजेश पाठक की नितिन नवीन से हालिया मुलाकात ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ सीएम योगी की बैठक को केवल मंत्रिमंडल विस्तार तक सीमित नहीं देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में भी कुछ अहम बदलाव हो सकते हैं। पार्टी नेतृत्व जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए संगठन में नई जिम्मेदारियां सौंप सकता है। नितिन नवीन के साथ होने वाली बैठक को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इन बैठकों को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि एजेंडा इससे कहीं बड़ा है। भाजपा की नजरें अब पूरी तरह मिशन 2027 पर टिकी हैं। उत्तर प्रदेश में सत्ता को दोबारा मजबूत करने के लिए संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर रणनीतिक फैसले लिए जा सकते हैं।