Money Laundering Case: कश्मीर की कथित आतंकी फंडिंग पर अदालत सख्त, यासीन मलिक और इंजीनियर राशिद समेत सात के खिलाफ मुकदमा

दिल्ली की विशेष अदालत ने यासीन मलिक, इंजीनियर राशिद समेत सात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और कथित आतंकी फंडिंग मामले में मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। ED के अनुसार, मामले में 8.94 करोड़ रुपये की फंडिंग के आरोप हैं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 25 October 2026, 10:47 AM IST
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New Delhi: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक और बारामूला से सांसद इंजीनियर राशिद उर्फ अब्दुल रशीद शेख समेत सात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।

विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत आरोप तय किए हैं। अब इस मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

8.94 करोड़ रुपये की कथित अवैध फंडिंग का मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक, इस मामले में पाकिस्तान से हवाला चैनलों के जरिए करीब 8.94 करोड़ रुपये की कथित अवैध रकम जुटाने और विदेशी फंडिंग हासिल करने के आरोप हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और विध्वंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग से जुड़े आरोपों की जांच की गई है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद होगा।

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यासीन मलिक और इंजीनियर राशिद समेत सात आरोपी

इस मामले में यासीन मलिक और इंजीनियर राशिद के अलावा जहूर अहमद शाह वताली, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट्ट और ट्राइससन फॉर्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के नाम शामिल हैं। अदालत के आदेश के बाद अब अभियोजन पक्ष आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करेगा। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। सभी आरोपियों के खिलाफ तय आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।

यासीन मलिक और इंजीनियर राशिद (Img- X)

19 नवंबर 2026 से दर्ज होंगे अभियोजन पक्ष के साक्ष्य

मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया 19 नवंबर 2026 से शुरू होने की जानकारी दी गई है। इस चरण में जांच एजेंसी की ओर से जुटाए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत के सामने पेश किए जा सकते हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत मामले से जुड़े आरोपों का परीक्षण करेगी। सुनवाई के दौरान आरोपियों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

2017 की प्राथमिकी से जुड़ा है मनी लॉन्ड्रिंग केस

मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से वर्ष 2017 में दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है। मूल मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपों की जांच की गई थी। इसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने 14 जून 2017 को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।

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अब विशेष अदालत में मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ कथित फंडिंग और उसके इस्तेमाल से जुड़े आरोपों पर सुनवाई होगी। फिलहाल, मामले में अंतिम दोषसिद्धि नहीं हुई है और आरोपों का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।

Location :  New Delhi

Published :  25 October 2026, 10:47 AM IST

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