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सुप्रीम कोर्ट (Img : pinterest)
New Delhi: शराबबंदी की नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने सवाल उठाया कि कई राज्यों में लागू शराबबंदी से आखिर क्या हासिल हुआ और क्या इसके अपेक्षित नतीजे सामने आए हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी से जुड़ी पांच बड़ी चुनौतियों का जिक्र किया, जिनमें राजस्व का नुकसान, लागू करने में भारी खर्च, पुलिस भ्रष्टाचार, अवैध शराब का कारोबार और नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे को शामिल किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शराब की बिक्री पर रोक लगाने से सरकारों को मिलने वाले आबकारी राजस्व में भारी कमी आती है। कई राज्यों के लिए यह आय का बड़ा स्रोत होती है, जिसके बंद होने से सरकारी योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन पर असर पड़ सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि शराबबंदी लागू करने के लिए निगरानी व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और तस्करी रोकने में सरकार को काफी खर्च करना पड़ता है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने शराबबंदी के बाद सामने आने वाली अवैध गतिविधियों का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि जब वैध शराब की उपलब्धता बंद होती है तो अवैध कारोबार करने वाले सक्रिय हो सकते हैं। अदालत ने पुलिस और प्रशासन में भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका को भी एक बड़ी चुनौती बताया। कोर्ट के मुताबिक शराबबंदी के दौरान अवैध बिक्री रोकने के लिए तैनात तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे भ्रष्ट गतिविधियों की संभावना बढ़ सकती है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने गुजरात और अन्य राज्यों में जहरीली शराब से हुई मौतों का भी उल्लेख किया। अदालत ने भावनगर (गुजरात) और सागर (मध्य प्रदेश) में हुई जहरीली शराब की घटनाओं को प्रशासन के लिए चेतावनी बताया। पीठ ने कहा कि इतिहास बताता है कि पूरी तरह शराबबंदी लागू करने से कई बार शराब का कारोबार भूमिगत हो जाता है और इससे जहरीली तथा गैर-कानूनी शराब का खतरा बढ़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में लंबे समय से लागू शराबबंदी नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में कई बड़ी जहरीली शराब त्रासदियां सामने आ चुकी हैं। अदालत के अनुसार स्वतंत्रता के बाद से गुजरात में जहरीली शराब की कई घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।
यह टिप्पणी इंडियन केमिकल काउंसिल और अन्य रसायन निर्माता कंपनियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पॉइजन रूल्स के नियम 18A और 18B को रद्द कर दिया। इन नियमों के तहत मेथनॉल की बिक्री को लेकर अतिरिक्त शर्तें लागू की गई थी। कोर्ट ने कहा कि सरकार की मंशा पर सवाल नहीं है, लेकिन किसी नियम को केवल अच्छी नीयत के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। सरकार यह साबित नहीं कर पाई कि एडिटिव्स मिलाने की प्रक्रिया जहरीली शराब बनाने की घटनाओं को रोकने में प्रभावी होगी। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि अगर अपराधी दूसरे मिलावटी पदार्थों का इस्तेमाल करें तो ऐसी स्थिति में सरकार की रोकथाम रणनीति क्या होगी।
Location : New Delhi
Published : 19 September 2026, 1:40 PM IST