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सोशल मीडिया पर फूटा आक्रोश (Img: AI)
Vidisha: "मैडम, कुछ मिनट ही तो लेट हुए हैं... मेरी बेटी का साल खराब हो जाएगा, इसकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। प्लीज अंदर जाने दीजिए।" यह चीख, यह मिन्नतें मध्य प्रदेश के विदिशा के एक NEET परीक्षा केंद्र के बंद लोहे के गेट से टकराकर दम तोड़ती रही हैं। अंदर बैठे अधिकारियों के पत्थर दिल नहीं पिघले और बाहर एक बेबस, लाचार किसान अपनी रोती हुई बेटी को सीने से लगाए खुद घुटनों पर बैठकर रो पड़ा। सोशल मीडिया पर इसका भावुक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
यह सिर्फ एक परीक्षा छूटने की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे गरीब किसान की कहानी है जिसने अपनी बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए चिलचिलाती धूप में कड़ी मेहनत कर खेतों में खून-पसीना बहाया। यह उस बेटी की भी कहानी है जिसने नाम के आगे डॉक्टर लगने की उम्मीद में परीक्षा की तैयारी दिन-रात की। सालों की मेहनत और बुने हुए सारे खूबसूरत सपने परीक्षा केंद्र के उस बंद दरवाजे की चौखट पर आकर बिखर गए।
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वीडियो में साफ दिख रहा है कि लड़की अंदर जाने के लिए वहां मौजूद शिक्षकों के आगे हाथ जोड़ रही है, गिड़गिड़ा रही है, लेकिन टीचर का कहना है कि "एक घंटा पहले आना चाहिए था, अब कुछ नहीं हो सकता।" इस गंदे रवैए के बाद अभ्यर्थी और उसके पिता दोनों गेट के बाहर रोते-रोते बेहाल हो गए, लेकिन व्यवस्था ने उनको नजरअंदाज कर दिया।
वीडियो वायरल होते ही इंटरनेट पर आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा है। लोग इस क्रूर व्यवस्था से तीखे सवाल पूछ रहे हैं क्या देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में देश के सबसे गरीब और मजबूर बच्चों के लिए कोई मानवीय कोना नहीं बचा है? क्या चंद मिनटों की देरी किसी के सालों की मेहनत और एक पूरे परिवार के भविष्य का हनन होना काफी है? नियम व्यवस्था बनाए रखने के लिए होते हैं, लेकिन जब वही नियम किसी गरीब के सपनों का गला घोंटने लगें, तो सोचना पड़ेगा कि हम कैसा समाज बना रहे हैं।
Location : Madhya Pradesh
Published : 22 June 2026, 1:11 PM IST