पारंपरिक कांथा कढ़ाई को वैश्विक मंच तक पहुंचाने वाली तृप्ति मुखर्जी कौन? जिन्हें राष्ट्रपति देंगी पद्मश्री सम्मान

पश्चिम बंगाल की शिल्पी तृप्ति मुखर्जी को कांथा कढ़ाई को बढ़ावा देने और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पद्मश्री मिलेगा। 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मानित करेंगी। उन्होंने इस कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई है।

Updated : 22 May 2026, 9:17 AM IST
google-preferred

New Delhi: पश्चिम बंगाल की पारंपरिक कांथा कढ़ाई को नई पहचान दिलाने वाली शिल्पी तृप्ति मुखर्जी को इस वर्ष पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में उनके योगदान को देखते हुए यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें प्रदान किया जा रहा है। 25 मई को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी।

37 वर्षों से कांथा कढ़ाई से जुड़ा सफर

तृप्ति मुखर्जी पिछले करीब 37 वर्षों से कांथा कढ़ाई के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने न केवल इस पारंपरिक कला को संरक्षित करने का काम किया, बल्कि इसे आजीविका का मजबूत साधन भी बनाया। उनकी कोशिशों से यह कला केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम भी बन गई।

Miss World 2024: कौन हैं नंदिनी गुप्ता?, भारतीय संस्कृति की झलक से जीता विश्व का दिल

प्रशिक्षण केंद्र से महिलाओं को मिला रोजगार

1966 में जन्मीं तृप्ति मुखर्जी ने अपनी मां से प्रेरणा लेकर कम उम्र में ही कांथा कढ़ाई में रुचि विकसित की थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल के सूरी में एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया, जहां महिलाओं को कांथा कढ़ाई, साड़ी डिजाइनिंग और वॉल हैंगिंग, बेडशीट, स्टोल और दुपट्टा बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

इस केंद्र से प्रशिक्षित महिलाएं विभिन्न सरकारी मेलों और प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद बेचकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे कई ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय कला का प्रदर्शन

तृप्ति मुखर्जी ने कांथा कढ़ाई को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। 2017 में उन्होंने ब्रिटेन के बर्मिंघम में इस पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। इसके अलावा 2025 में टोक्यो में आयोजित इंडिया ट्रेंड फेयर में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिससे इस कला को वैश्विक पहचान मिली।

नैनीताल की वादियों में बढ़ती आस्था, जहां बाबा नीम करौली की दिव्यता ने कैंची धाम को दे दी नई पहचान

पहले भी मिल चुके हैं कई प्रतिष्ठित सम्मान

उनके लंबे योगदान को पहले भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2010 में उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार प्रमाण पत्र मिला। इसके बाद 2016 में वस्त्र मंत्रालय द्वारा शिल्प गुरु पुरस्कार दिया गया। 2017 में पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें बंगश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।

महिला सशक्तिकरण और हस्तशिल्प के लिए प्रेरणा

तृप्ति मुखर्जी को मिलने वाला पद्मश्री सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय हस्तशिल्प परंपरा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश भी है। उनकी पहल ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ पारंपरिक कला को नई पहचान दिलाई है।

Location :  New Delhi

Published :  22 May 2026, 9:17 AM IST

Advertisement