NCERT की किताब पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” वाले सिलेबस पर आखिर क्या बोला कोर्ट?

एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की किताब में “न्यायपालिका में करप्शन” अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट भड़क उठा है। कोर्ट ने माफी ठुकराते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया, किताब पर बैन लगाया और सभी फिजिकल व डिजिटल कॉपी हटाने के आदेश दिए हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 26 February 2026, 3:05 PM IST
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New Delhi: शिक्षा की किताबों में छिपा एक विवाद जब सीधे न्यायपालिका से टकराया तो मामला सिर्फ पाठ्यक्रम का नहीं रहा, बल्कि सिस्टम की साख का सवाल बन गया। एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की किताब में “न्यायपालिका में करप्शन” जैसे संवेदनशील विषय पर अध्याय शामिल किए जाने के बाद देश की सर्वोच्च अदालत भड़क उठी। सुनवाई के दौरान माहौल ऐसा रहा जैसे अदालत में किसी गंभीर अपराध का खुलासा हुआ हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि यह सिर्फ माफी का मामला नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय होगी और कार्रवाई भी होगी।

सुनवाई में गरमाया माहौल

कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि एनसीईआरटी की तरफ से बिना शर्त माफी मांगी गई है, लेकिन सीजेआई ने दो टूक शब्दों में कहा, “नाम बताओ, एक्शन हम लेंगे।” कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह मामला बंद नहीं होगा और इसमें न्यायिक दखल जरूरी है। अदालत ने कहा कि यह आलोचना को दबाने की कोशिश नहीं है, बल्कि शिक्षा की ईमानदारी को बचाने का सवाल है। छात्रों को इस उम्र में एकतरफा सोच देना गलत है, इससे संस्थागत ढांचे को लेकर गलतफहमियां पैदा होती हैं।

अवमानना तक पहुंचा मामला

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने यहां तक कह दिया कि कारण बताओ नोटिस की बजाय कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल माफी स्वीकार करने से इनकार करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि माफी स्वीकार होगी या नहीं, यह बाद में तय किया जाएगा, लेकिन अभी मामला गंभीर है और इसकी पूरी जांच होगी।

किताब पर बैन और जब्ती के आदेश

कोर्ट ने एनसीईआरटी को आदेश दिया कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जाए कि किताब की सभी हार्ड और सॉफ्ट कॉपी, चाहे स्कूलों में हों या बाजार में, पब्लिक एक्सेस से हटाई जाएं। सभी फिजिकल और डिजिटल प्लेटफॉर्म से तुरंत कॉपी हटाने के निर्देश दिए गए और दो हफ्ते में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया। साथ ही एनसीईआरटी डायरेक्टर को जिम्मेदारी दी गई कि स्कूलों में भेजी गई सभी किताबें तुरंत जब्त की जाएं। किताब के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।

न्यायपालिका पर हमला या लापरवाही?

सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एनसीईआरटी के इस कदम ने न्यायपालिका पर “गोलीबारी” की है और पब्लिक डोमेन में आने के बाद किताबें वापस लेने का कोई मतलब नहीं है। वरिष्ठ वकीलों ने इसे गहरी साजिश बताया और कोर्ट ने साफ कहा कि वह यह पता लगाएगा कि जिम्मेदार कौन है और सजा भी तय होगी।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 26 February 2026, 3:05 PM IST

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