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इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रदर्शन के आरोप में तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली और हिमाचल पुलिस के बीच टकराव हो गया। बिना सूचना कार्रवाई पर विवाद बढ़ा और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।
Delhi Police
New Delhi: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में अर्धनग्न प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ विवाद अब दो राज्यों की पुलिस के बीच सीधी टकराव की वजह बन गया है। मामला उस वक्त गरमा गया जब दिल्ली पुलिस ने हिमाचल प्रदेश में दबिश देकर तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी औपचारिक जानकारी नहीं दी। इस कार्रवाई के बाद हालात ऐसे बने कि दिल्ली और हिमाचल पुलिस आमने-सामने आ गईं और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस की 13 सदस्यीय टीम बुधवार शाम करीब 5:30 बजे छह गाड़ियों में रोहड़ू के एक मशहूर रिसॉर्ट पहुंची। यहां से तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया। इन पर Indian Youth Congress से जुड़े कार्यकर्ता होने और India AI Impact Summit 2026 के दौरान विरोध प्रदर्शन में शामिल रहने का आरोप है।
बिना सूचना कार्रवाई पर बढ़ा विवाद
जैसे ही शिमला पुलिस को इस कार्रवाई की खबर मिली, उन्होंने शहर और आसपास के इलाकों में चेकपॉइंट लगा दिए। शोघी बैरियर पर दिल्ली पुलिस की गाड़ियों को रोक लिया गया। हिमाचल पुलिस का कहना है कि किसी भी इंटरस्टेट ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस को पहले से सूचना देना जरूरी होता है। बिना तालमेल की गई कार्रवाई पर उन्होंने एतराज जताया।
मामला बढ़ता देख बालूगंज थाने ने दखल दिया और केस शिमला जिला कोर्ट के कोर्ट नंबर 2 में पहुंचा। सुनवाई के दौरान हिमाचल पुलिस ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। अगली सुनवाई 26 फरवरी को तय की गई है।
दिल्ली पुलिस टीम पर FIR
इधर शिमला में रात करीब 8:30 बजे दिल्ली पुलिस टीम के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई। दिल्ली पुलिस के अधिकारी राहुल के मुताबिक, उनकी टीम को सुबह से ही रोका गया और दिल्ली लौटने की इजाजत नहीं दी गई। गाड़ियों को शोघी बैरियर पर खड़ा रखा गया, जहां देर रात तक दोनों पक्षों के बीच बहस चलती रही।
कानूनी जानकारों का कहना है कि अंतरराज्यीय मामलों में साफ कोऑर्डिनेशन, पूर्व सूचना और प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी है। अगर एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में कार्रवाई करती है, तो स्थानीय प्रशासन को विश्वास में लेना कानूनी और प्रशासनिक रूप से अनिवार्य माना जाता है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।