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AGMUT कैडर के IPS अधिकारी देवेश कुमार महला (Img: Dynamite News)
New Delhi: डाइनामाइट न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने आज का The Candid Talk पॉडकास्ट में 2012 बैच के AGMUT कैडर के IPS अधिकारी देवेश कुमार महला से खास बातचीत की। IPS अधिकारी देवेश कुमार महला ने बातचीत में बेबाक सवालों का सीधा जवाब दिया। डाइनामाइट न्यूज़ के दिल्ली स्टूडियो में 2012 बैच के AGMUT कैडर के IPS अधिकारी देवेश कुमार महला ने हाई-सिक्योरिटी जोन से लेकर डिजिटल दुनिया के बढ़ते साइबर अपराधों पर बेबाक बातचीत की।
The Candid Talk के इस खास एपिसोड में डाइनामाइट न्यूज़ के स्टूडियो में बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं रही, बल्कि कई ऐसे सवाल उठे जो आमतौर पर पर्दे के पीछे रह जाते हैं। बातचीत में देवेश कुमार महला ने पुलिसिंग की असली चुनौतियों, VIP सुरक्षा के दबाव, साइबर क्राइम के बदलते स्वरूप और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर खुलकर राय रखी। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में काम करना सिर्फ पुलिसिंग नहीं बल्कि “हर पल एक टेस्ट” है, जहां एक छोटी सी चूक भी राष्ट्रीय सुर्खियां बन सकती है।
युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए IPS अधिकारी ने साफ कहा कि UPSC कोई आसान परीक्षा नहीं है, लेकिन असंभव भी नहीं है। उनका कहना था कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि “जब भी पढ़ाई करें तो पूरे मन से करें ताकि परीक्षा में बैठने पर कुछ नया न लगे।” उन्होंने इंटरव्यू को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही कि “जो आता है उसे आत्मविश्वास से बोलो और जो नहीं आता, उसे ईमानदारी से स्वीकार करो।”
नई दिल्ली जिले में DCP रहते हुए अनुभव साझा करते हुए देवेश कुमार ने कहा कि यहां पावर से ज्यादा “एक्सपेक्टेशन और प्रेशर” होता है। उन्होंने बताया कि लुटियन्स दिल्ली में देश के शीर्ष नेता, दूतावास और हाई-प्रोफाइल संस्थान मौजूद हैं, ऐसे में छोटी घटना भी बड़ी खबर बन जाती है। इसलिए पुलिसिंग में हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाना पड़ता है।
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आज के समय में साइबर क्राइम पर बात करते हुए उन्होंने इसे “बॉर्डरलेस क्राइम” बताया। उनका कहना था कि अपराधी अब देश की सीमाओं के बाहर बैठकर भी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि धमकी, फ्रॉड, एक्सटॉर्शन और बैंकिंग फ्रॉड जैसे मामले अब पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं, जिससे पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि उन्होंने AI को एक मजबूत टूल बताते हुए कहा कि अगर इसका सही इस्तेमाल किया जाए तो यह इन्वेस्टिगेशन को काफी आसान बना सकता है।
देवेश कुमार महला ने कहा कि आजकल अचानक होने वाले छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। बिना किसी पूर्व सूचना के 10-15 लोग कहीं भी इकट्ठा होकर प्रदर्शन शुरू कर देते हैं, जिससे ट्रैफिक, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में तुरंत निर्णय लेना और भीड़ को नियंत्रित करना सबसे कठिन काम होता है।
पॉडकास्ट में सबसे अहम चर्चा 26 जनवरी परेड को लेकर रही। उन्होंने बताया कि 2024 में उन्होंने केवल 10 दिन पहले नई जिम्मेदारी संभाली थी और शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती थी इलाके को समझना और रूट मैपिंग। उन्होंने कहा कि “कौन सी सड़क से जनता आती है, कहां चेकिंग होती है और कैसे मूवमेंट होता है ये सब समझना सबसे जरूरी था।” 2024 के अनुभवों को उन्होंने 2025 की तैयारी में इस्तेमाल किया और ग्राउंड लेवल पर सुधार कर आयोजन को और बेहतर तरीके से सफल बनाया।
उन्होंने बताया कि वो इतना अच्छे से हुआ कि वो एक बेस्ट एवर 26 जनवरी अरेंजमेंट था, जिसके लिए डिफेंस सेक्रेटरी ने स्पेशली गजट नोटिफाई करके हमारे लिए डिस्क और अप्रिशिएशन लेटर भी मेरे और मेरी तमाम टीम के लिए कराया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण दो चीजें आती हैं, एक तो निश्चित ही वीआईपी सुरक्षा और लोगों की चेकिंग। दूसरा आता है, जो मैंने 24 में देखा था कि लोगों का जो चैनलाइजिंग मूवमेंट है, वह बहुत ज्यादा लोगों का और ट्रैफिक का, व्हीकल्स का चैनलाइजिंग मूवमेंट है। उसको अगर आप प्रॉपरली एक डायरेक्शन देकर स्मूथ मूवमेंट करवा देते हैं तो आपकी 80% समस्याएं खत्म हो जाती हैं।
इस सवाल पर IPS अधिकारी ने कहा कि किसी भी जगह की अगर सेफ्टी, लॉ एंड ऑर्डर देखना चाहते हैं, तो आप यह देखें कि उस जगह के उसके नेबरिंग जगहों के लैंड प्राइसेज में कितना डिफरेंस है। अगर आप एग्जामिन करके देखें दिल्ली के और उसके नेबरिंग प्लेसेज के लैंड प्राइसेज में डिफरेंस, तो आपको पता चलेगा कि दिल्ली कितनी सेफ और सिक्योर है।
दूसरा, दिल्ली में अगर आप 112 पर कॉल करते हैं, पुलिस निश्चित ही आएगी और ऑन मेरिट जो एक्शन होगा, वो लेगी। ऐसा शायद ही किसी दूसरी जगह पर होगा दिल्ली के अलावा कि अगर आपका बच्चा, एक माइनर बच्चा है और वो घर नहीं लौटा है, एक-दो घंटे हो गए और आप पुलिस में जाते हैं, तो पुलिस तुरंत FIR रजिस्टर करती है। वो इस चीज का इंतजार या उस चीज को लेकर नहीं चलती कि जी आप शाम तक इंतजार कर लो, आपका बच्चा आ जाएगा। इतनी तत्परता से, लगभग 600 से ज्यादा गाड़ियां पुलिस की हर टाइम पेट्रोलिंग में, सेंट्रली कंट्रोल होती हैं।
उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली में क्राइम बहुत हाईलाइट होते हैं। राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण यहां पर मीडिया का फोकस बहुत ज्यादा है। फोकस होने के कारण यहां के क्राइम जो भी होते हैं, वो हाईलाइट होते हैं, जिसके कारण एक परसेप्शन बनता है। करीब 40% या उससे अधिक पुलिस पर्सनल जो दिल्ली में हैं, वो या तो BP, शुगर, हाइपरटेंशन इन चीजों से ग्रसित हैं और उसका कारण सिर्फ एक है कि उन लोगों के ड्यूटी आवर्स इतने लंबे हैं कि वो लोग अपने घर नहीं जा पाते, ना प्रॉपरली अपने घर का खाना खा पाते हैं। वह स्ट्रीट फूड या कैंटीन में मिलने वाले खाने पर निर्भर रहते हैं और ना ही सो पाते हैं।
पुलिसिंग का काम होता है लॉ एंड ऑर्डर, क्राइम मेंटेन करना, लोगों में अपनी बातचीत बनाना, लोगों के साथ मीटिंग करना, मिलना। आज के समय में दिल्ली पुलिस का लॉ एंड ऑर्डर और क्राइम में ही 60% ऑफ टाइम फोकस रहता है। उसके अलावा जो एक्स्ट्रा 40% duties known policing के ऊपर काफी ज्यादा समय पुलिस का जाता है। दिल्ली एक ऐसी जगह है जहां पर बहुत ही फास्ट एंड इमीडिएट एक्शन करके रिजॉल्यूशन की आवश्यकता पड़ती है।
आज आप देखिए, एक एक्सीडेंट हो गया, कोई फेटल एक्सीडेंट हो गया दिल्ली में या किसी को चोट लग गई, कॉल आ गई, तो उसमें वह ऑफिसर जिसको एक कॉल असाइन हुई है, वह तब तक अपने घर नहीं जा सकता जब तक उसको पूरा कंप्लीट ना कर दें। अब उसको कंप्लीट होने में हो सकता है 24 घंटे लगें, 48 घंटे लगें। जबकि उसके बाद आने वाले ऑफिसर को वहां पर लेना चाहिए कि भाई, यह ऑफिसर जिसको कॉल असाइन हुई है, वह इसको एंड तक करेगा, एंड तक करके अपने घर जाएगा, खाना खाएगा, हो सकता है थोड़ा आराम करे, वापस ड्यूटी पर आ जाए, क्योंकि उसकी नेक्स्ट ड्यूटी भी लगी है। अगर उसमें नहीं आया तो उसकी हाजिरी नहीं लगेगी।
नशाखोरी की आदतें तब लगती हैं जब बच्चा स्कूल-कॉलेज में होता है और उसके बाद जब बच्चा बाहर आ जाता है स्कूल-कॉलेज से और वो एक सही दिशा नहीं पकड़ पाता है। बच्चे में जो एनर्जी है उसे सही डायरेक्शन नहीं मिलेगी तो निश्चित ही वो ऐसी चीजों में आएगा जहां उसके लिए उचित नहीं होगा। उसको एक सही दिशा और डायरेक्शन उसके एनर्जी को चैनलाइज करने के लिए आवश्यकता है। उसमें निश्चित ही सोसाइटी का, पेरेंट्स का, स्कूल का, सभी का योगदान होता है।
IPS अधिकारी देवेश कुमार महला निर्भया कांड पर बोले कि मैं उस समय ट्रेनिंग में था, लेकिन उसके बाद जब मैंने पुलिस पर्सनल और उसके बारे में पढ़ा, क्योंकि वह आपको समाज का एक दृष्टिकोण बताती है कि समाज किस चीज पर उग्र होता है और कैसे आगे जाता है। उसके बाद में काफी कठोर कानून भी सरकार ने बनाए। उनके अलावा निर्भया फंड भी बनाया, जिसके अंदर अगर किसी के साथ कोई घटना होती है, तो उनको आर्थिक मुआवजा भी दिया जाता है।
Location : New Delhi
Published : 24 May 2026, 11:31 AM IST