कलकत्ता हाईकोर्ट का अहम फैसला: महिला को अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगने कानूनी अधिकार, जानें क्यों माना जाएगा दहेज

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पत्नी अपने पति के दबाव में पैतृक संपत्ति में अपने वैध हिस्से की मांग करती है, तो यह दहेज की मांग के बराबर हो सकती है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 8 July 2026, 3:59 PM IST
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Calcutta: कलकत्ता हाईकोर्ट ने दहेज और सुसाइड के मामले को लेकर अहम फैसला सुनाया है। पति को दोषी करार देने के खिलाफ याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि किसी भी महिला को अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगने कानूनी अधिकार है, लेकिन ये मांग अगर पति के दबाव, मजबूरी या उत्पीड़न में की गई है तो इसे दहेज की मांग माना जाएगा।

कोर्ट ने क्या कहा

न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी और न्यायमूर्ति अपूर्बा सिन्हा राय की खंडपीठ ने दहेज हत्या के मामले में पति की सजा के खिलाफ अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। 2 जुलाई के फैसले में न्यायालय ने कहा कि एक महिला पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से का दावा करने की कानूनी रूप से हकदार है, लेकिन अगर यह दावा पति के दबाव के कारण किया जाता है तो यह दहेज की मांग के दायरे में आएगा।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी की मौत से जुड़ा है, जो जून 2014 में, महिला की शादी के लगभग चार साल बाद, वैवाहिक घर में फांसी पर लटकी हुई पाई गई थीं। निचली अदालत ने पाया कि महिला ने आत्महत्या की थी और आत्महत्या करने से पहले अपनी बेटी की भी हत्या कर दी थी।

अदालत ने पति और उसके माता-पिता को क्रूरता और दहेज हत्या का दोषी पाया। पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं,  सास-ससुर को सात साल की कैद की सजा दी गई।

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दहेज की मांग कब होती है?

अदालत ने पाया कि इसके बाद भी पति लगातार महिला पर दबाव डालता रहा कि वह अपने भाई से बाकी पुश्तैनी संपत्ति बेचने और उसके हिस्से की राशि सौंपने के लिए कहे। न्यायालय ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर होता है। न्यायालय ने कहा कि दहेज की मांग आमतौर पर वैवाहिक घर की चारदीवारी के भीतर ही की जाती है, न कि बाहरी लोगों की उपस्थिति में।

 

Location :  calcutta

Published :  8 July 2026, 3:30 PM IST

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