दिल्ली में चल रही थी ‘नकली स्मार्टफोन की फैक्ट्री’! आपका फोन भी कहीं फर्जी तो नहीं? ऐसे करें पहचान

दिल्ली में नकली स्मार्टफोन बनाने वाले बड़े रैकेट का खुलासा होने के बाद मोबाइल यूजर्स की चिंता बढ़ गई है। कई लोग अनजाने में ऐसे फोन इस्तेमाल कर रहे हैं जो दिखने में बिल्कुल असली लगते हैं। लेकिन कुछ छोटी गलतियां आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकती हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 11 May 2026, 8:36 AM IST
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New Delhi: दिल्ली में नकली स्मार्टफोन और एक्सेसरीज का बड़ा खेल सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है। राजधानी के करोल बाग और मोती नगर इलाके में दिल्ली पुलिस ने ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया है, जहां बड़े ब्रांड्स के नाम पर फर्जी मोबाइल और एक्सेसरीज तैयार किए जा रहे थे। पुलिस कार्रवाई में Oppo, OnePlus और Realme जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के नकली डिवाइस बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा हुआ है।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोग असली और नकली फोन में फर्क कैसे करें? क्योंकि कई बार नकली डिवाइस इतने प्रोफेशनल तरीके से तैयार किए जाते हैं कि आम ग्राहक आसानी से धोखा खा जाता है।

सिर्फ पैसा नहीं, जान का भी खतरा

नकली स्मार्टफोन और एक्सेसरीज सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि ये लोगों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं। खासतौर पर नकली बैटरी और चार्जर तेजी से गर्म होकर आग लगने जैसी घटनाओं का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, फर्जी मोबाइल डिवाइस में इस्तेमाल होने वाले सस्ते पार्ट्स जल्दी खराब हो जाते हैं। कई मामलों में फोन ब्लास्ट होने या ओवरहीटिंग की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। यही वजह है कि सस्ता फोन खरीदने के लालच में बिना जांच-पड़ताल के डिवाइस लेना भारी पड़ सकता है।

ऐसे करें असली और नकली फोन की पहचान

IMEI नंबर जरूर जांचें

मोबाइल की असलियत पहचानने का सबसे आसान तरीका उसका IMEI नंबर चेक करना है। हर ओरिजिनल फोन का अलग यूनिक IMEI नंबर होता है। इसे जानने के लिए फोन में *#06# डायल करें।
इसके बाद स्क्रीन पर दिख रहे नंबर को फोन के बॉक्स और बिल पर लिखे नंबर से मिलाएं। अगर तीनों जगह नंबर एक जैसा है, तो फोन असली होने की संभावना ज्यादा है।
इसके अलावा IMEI नंबर को सरकार के CEIR पोर्टल पर भी वेरिफाई किया जा सकता है। अगर नंबर रिकॉर्ड में नहीं मिलता, तो फोन नकली हो सकता है।

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पैकेजिंग भी खोल सकती है राज

नकली मोबाइल की पहचान उसकी पैकेजिंग से भी की जा सकती है। कई बार फर्जी डिवाइस के बॉक्स पर लोगो धुंधले होते हैं, स्पेलिंग मिस्टेक दिखाई देती है या प्रिंटिंग क्वालिटी खराब होती है। वहीं असली स्मार्टफोन की पैकेजिंग प्रोफेशनल और साफ-सुथरी होती है। बॉक्स पर सीरियल नंबर, ब्रांडिंग और सर्टिफिकेशन मार्क्स सही तरीके से दिए जाते हैं। अगर पैकिंग संदिग्ध लगे, तो फोन खरीदने से बचना चाहिए।

सस्ते ऑफर के चक्कर में न पड़ें

अगर कोई महंगा स्मार्टफोन बाजार कीमत से काफी कम दाम में मिल रहा है, तो सतर्क हो जाइए। कई बार फर्जी डिवाइस को आकर्षक ऑफर बताकर बेचा जाता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोबाइल हमेशा ऑथराइज्ड स्टोर या भरोसेमंद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ही खरीदना चाहिए। खरीदते समय GST बिल, वारंटी कार्ड और इनवॉइस जरूर लें। यही दस्तावेज बाद में किसी शिकायत या सर्विस में काम आते हैं।

सॉफ्टवेयर और बिल्ड क्वालिटी भी करें चेक

फर्जी फोन की पहचान उसके प्रदर्शन से भी हो सकती है। नकली डिवाइस अक्सर स्लो काम करते हैं, जल्दी गर्म होते हैं और कैमरा क्वालिटी भी खराब होती है।
फोन खरीदने के बाद सेटिंग्स में जाकर मॉडल नंबर, एंड्रॉयड वर्जन और सिक्योरिटी अपडेट जरूर जांचें। असली स्मार्टफोन कंपनियां समय-समय पर ऑफिशियल अपडेट जारी करती हैं, जबकि नकली फोन में अपडेट नहीं मिलते या बहुत देर से आते हैं।

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बढ़ता फर्जी बाजार बना चुनौती

दिल्ली में सामने आए इस मामले ने यह साफ कर दिया है कि नकली इलेक्ट्रॉनिक सामान का कारोबार तेजी से फैल रहा है। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में ऐसे डिवाइस खुलेआम बेचे जा रहे हैं। ऐसे में ग्राहकों को सतर्क रहने की जरूरत है। थोड़ी सावधानी न सिर्फ आपके पैसे बचा सकती है, बल्कि आपकी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  11 May 2026, 8:36 AM IST

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