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देश के चर्चित शो The Candid Talk में इस बार वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश के साथ बातचीत में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और सीएससी के प्रबंध निदेशक रहे दिनेश त्यागी ने ब्यूरोक्रेसी से जुड़े कई रहस्यों का राज खोला। उनका अफसरों पर राजनेताओं के दवाब से लेकर गुड गवर्नेंस में आईएएस अफसरों की भूमिका समेत बड़े मुद्दों पर बातचीत की।
New Delhi: देश के चर्चित पॉडकास्ट The Candid Talk में इस बार वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और देश में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के प्रबंध निदेशक रहे मणिपुर कैडर के 1981 बैच के आईएएस अधिकारी दिनेश त्यागी से बातचीत की। दिनेश त्यागी ने सीएससी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।
The Candid Talk में दिनेश त्यागी ने ब्यूरोक्रेसी से जुड़ी कई अंदरुनी बातों से अवगत कराया और ये भी बताया कि कैसे एक आईएएस अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन करके देश के विकास और आम आदमी को सुविधा-संपन्न बनाने में अपनी भूमिका निभा सकता है।
जमीन से सीख, तभी बनता है अफसर
दिनेश कुमार त्यागी ने डाइनामाइट न्यूज़ के साथ विशेष बातचीत में बताया कि एक आईएएस अधिकारी के सामने सिर्फ एक नहीं बल्कि हजारों चुनौतियां होती हैं। सिस्टम के भीतर रहकर काम करना आसान नहीं होता। सेवा की शुरुआत में जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण (ग्राउंडिंग) होता है। अलग-अलग विभागों की कार्यप्रणाली को समझना पड़ता है और बाद में बड़े पदों पर भारी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।
सभी के साथ संतुलन बनाकर चलना बेहद जरूरी
करीब चार दशकों के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि एक आईएएस अधिकारी को मल्टीटास्किंग की क्षमता और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की समझ विकसित करनी होती है। यह समझ जमीनी स्तर पर काम करने से आती है। वहां जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और आम जनता सभी के साथ संतुलन बनाकर चलना पड़ता है। हर वर्ग की अपनी अपेक्षाएं होती हैं और उन्हीं के बीच रहकर सरकार की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना असली चुनौती होती है।
क्यों हुई सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) की स्थापना?
दिनेश कुमार त्यागी ने सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) की स्थापना की। जिसका उद्देश्य भी इसी सोच से जुड़ा था। त्यागी बताते हैं कि एक बार वे अभ्यर्थियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने पूछा कि कितने लोग कभी सरकारी दफ्तर गए हैं, इस सवाल पर लगभग 90 प्रतिशत लोगों ने हाथ उठाया। फिर उन्होंने दूसरा सवाल किया कि उनमें से कितने लोग दोबारा सरकारी दफ्तर जाना चाहेंगे, उस सवाल पर सभी ने मना कर दिया। इसका कारण था कि सरकारी दफ्तरों में आम नागरिक को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नियम तो होते हैं, लेकिन उनकी प्रक्रिया कई बार लोगों के लिए जटिल और कष्टदायक बन जाती है।
सीएससी की उपलब्धियां आज तक
इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए सीएससी की शुरुआत की गई। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस पहल के तहत आज देशभर में 5.87 लाख से अधिक सीएससी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमें से लगभग 4.57 लाख केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जबकि करीब 1.29 लाख केंद्र शहरी इलाकों में कार्यरत हैं। इन केंद्रों के माध्यम से सरकारी सेवाएं लोगों तक सरल और पारदर्शी तरीके से पहुंचाई जा रही हैं।
आईएएस के ऊपर अवैध कार्य कराने का दबाव आता है तो क्या करें?
दिनेश कुमार त्यागी का कहना है कि यदि किसी अधिकारी के पास कोई अवैध कार्य कराने का दबाव आता है तो सेवा का अनुभव उसे यह सिखा देता है कि वह बिना किसी को आहत किए और बिना नियमों का उल्लंघन किए उस काम को कैसे मना करे। चाहे कितना भी बड़ा दबाव क्यों न हो, कानून और नैतिकता के दायरे में रहकर काम करना ही एक सच्चे प्रशासनिक अधिकारी की पहचान है।