सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिला SSC अफसरों को पूरी पेंशन, भेदभाव पर की ये कड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला SSC अफसरों को बड़ी राहत देते हुए पूरी पेंशन देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि भेदभाव के कारण उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिला, अब 20 साल सेवा मानकर लाभ दिया जाएगा।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 24 March 2026, 2:58 PM IST
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अफसरों के पक्ष में बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि जिन महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन (PC) नहीं मिला, उन्हें अब पूरी पेंशन का लाभ मिलेगा। यह फैसला मंगलवार को जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया।

भेदभावपूर्ण व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि महिला अफसरों को स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं थी, बल्कि यह व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का परिणाम था। अदालत ने माना कि चयन प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली में भी महिलाओं के साथ असमानता हुई, जिससे उनके करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

20 साल की सेवा मानकर पेंशन का लाभ

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन महिला SSC अफसरों को समय से पहले सेवा से हटाया गया है, उन्हें यह मानकर लाभ दिया जाएगा कि उन्होंने 20 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। इसके आधार पर उन्हें पेंशन और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएंगे, हालांकि पिछला वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा।

तीन श्रेणियों में दिया गया फैसला

कोर्ट ने अपने आदेश में तीन प्रमुख श्रेणियां तय कीं। पहली, जिन अफसरों को पहले ही परमानेंट कमीशन मिल चुका है, उनका स्टेटस नहीं बदला जाएगा। दूसरी, जो सेवा से बाहर हो चुकी महिला अफसर हैं, उन्हें 20 साल की सेवा मानकर पेंशन मिलेगी। तीसरी, वर्तमान में सेवा में मौजूद महिला अफसरों को 60% कटऑफ के आधार पर स्थायी कमीशन दिया जाएगा।

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कुछ विशेष कैडर को राहत से बाहर रखा गया

यह आदेश जज एडवोकेट जनरल (JAG) और आर्मी एजुकेशन कोर (AEC) पर लागू नहीं होगा, क्योंकि इन्हें पहले से ही अलग नीति के तहत स्थायी कमीशन का अवसर मिलता रहा है।

सेना, नौसेना और वायुसेना पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि थलसेना में महिला अफसरों की एसीआर रिपोर्ट में पूर्वाग्रह दिखा, जिससे उनकी प्रगति प्रभावित हुई। नौसेना में मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता की कमी पाई गई, जबकि वायुसेना में न्यूनतम मानदंडों को जल्दबाजी में लागू किया गया, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हुई।

*लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा

यह मामला 23 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत 2003 में बबीता पुनिया की याचिका से हुई थी। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन सरकार की 2019 की नीति के बाद मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब जाकर महिलाओं को अंतिम राहत मिली है।

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सरकार और पक्षकारों की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद वरिष्ठ वकीलों ने इसे महिला अधिकारियों के लिए ऐतिहासिक बताया। अदालत में मौजूद पक्षकारों ने भी इस निर्णय को समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम करार दिया।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 24 March 2026, 2:58 PM IST

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