Shravani Mela 2026: देवघर में उमड़ेगा आस्था का सैलाब, लेकिन क्या प्रशासन संभाल पाएगा भीड़ का यह तूफान?
श्रावणी मेला 2026 के लिए देवघर में प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं। सुल्तानगंज से देवघर तक लाखों कांवरियों की यात्रा के बीच सांस्कृतिक मंचों की योजना बनाई गई है। उद्देश्य श्रद्धालुओं की थकान कम करना और भक्ति माहौल बनाना है। वहीं भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा बड़ी चुनौती बनी हुई है।
Deoghar: सावन के आगमन के साथ ही देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धा और आस्था का माहौल गहराने लगा है। कुछ ही दिनों में सुल्तानगंज से लाखों कांवरिए गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा कर देवघर पहुंचेंगे। यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और संकल्प का विशाल संगम मानी जाती है।
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जिला प्रशासन ने श्रावणी मेला 2026 की तैयारियां तेज कर दी हैं। उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया लगातार कांवरिया पथ, टेंट सिटी, पार्किंग स्थल और सीमा क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। वहीं पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर के लिए यह मेला सुरक्षा व्यवस्था की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
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इस बार कांवरिया पथ को सांस्कृतिक ऊर्जा से भरने की विशेष योजना बनाई गई है। दुम्मा बॉर्डर से लेकर बाबा मंदिर तक विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक मंच लगाए जाएंगे। अब तक करीब 65 टीमों का चयन किया जा चुका है, जिनमें भजन, लोकगीत, नृत्य, नाटक और झांकी प्रस्तुत करने वाले कलाकार शामिल हैं।
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प्रशासन द्वारा कलाकारों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटा जा रहा है। ए-श्रेणी की टीमों को लगभग 7 हजार रुपये तक मानदेय दिए जाने की संभावना है। वाराणसी, पटना, कोलकाता, रांची और झारखंड-बिहार के कई जिलों से कलाकार इस आयोजन में भाग ले रहे हैं।
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श्रावणी मेला के दौरान प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। पिछले वर्षों में अव्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ चुके हैं, जिससे इस बार दबाव और बढ़ गया है।
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इस बार प्रशासन एक नई अवधारणा पर काम कर रहा है, जिसे विशेषज्ञ “कल्चरल मोशन मैपिंग सिस्टम” कह रहे हैं। इसके तहत कांवरिया पथ पर लगाए गए सांस्कृतिक मंचों की लोकेशन को भीड़ के मूवमेंट डेटा के साथ जोड़ा जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की थकान और भीड़ ज्यादा है।
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यह मॉडल पहली बार इतने बड़े धार्मिक आयोजन में लागू किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ भीड़ का दबाव कम होगा बल्कि कलाकारों की प्रस्तुति को भी उसी हिसाब से डायनामिक तरीके से शिफ्ट किया जा सकेगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो इसे आगे अन्य बड़े मेलों में भी लागू किया जा सकता है।