भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर शिकंजा, बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में ब्रिटिश अदालत ने सुनाया फैसला

नीरव मोदी को ब्रिटिश कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। लंदन हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें 100 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत ने व्यक्तिगत गारंटी को वैध मानते हुए नीरव को देनदार ठहराया।

Updated : 24 June 2026, 10:09 AM IST
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New Delhi: भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की अदालत से बड़ा झटका लगा है। लंदन हाईकोर्ट ने Bank of India के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी को बैंक फ्रॉड मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। विदेशी मुद्रा में यह बकाया राशि करीब 10.7 मिलियन डॉलर बताई गई है।

हाईकोर्ट के न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने नीरव मोदी को उनकी व्यक्तिगत गारंटी के तहत देनदार माना है। अदालत के आदेश के बाद बैंक ऑफ इंडिया अब नीरव मोदी से बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा।

4.1 मिलियन डॉलर की मूल राशि पर देना होगा ब्याज

रिपोर्ट्स के अनुसार, नीरव मोदी पर करीब 4.1 मिलियन डॉलर यानी लगभग 38.9 करोड़ रुपये की मूल राशि बकाया है। इसके अलावा बैंक द्वारा निर्धारित ब्याज भी इस राशि में जोड़ा जाएगा। इसी वजह से कुल भुगतान राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने की संभावना है।

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मामला बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दिए गए कर्ज से जुड़ा है। बैंक ने जुलाई 2012 में नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को दुबई में कर्ज दिया था। इसके बाद 3 अगस्त 2013 को नीरव मोदी ने इस कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

नीरव मोदी ने गारंटी को बताया था गैर-लागू

हाईकोर्ट में नीरव मोदी की ओर से तर्क दिया गया था कि व्यक्तिगत गारंटी को लागू नहीं किया जा सकता। उसने यह भी दावा किया था कि बैंक की ओर से उसे वैध मांगें कभी प्राप्त नहीं हुईं।

हालांकि, सुनवाई के दौरान नीरव मोदी या उसके वकीलों की ओर से कोई स्पष्ट बचाव पेश नहीं किया गया। न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और माना कि बैंक की ओर से भेजी गई मांगें उसे प्राप्त हुई थीं।

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2018 में सामने आए विवाद के बाद बैंक ने मांगा कर्ज

साल 2018 की शुरुआत में जब नीरव मोदी से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक कथित धोखाधड़ी मामले की खबर सामने आई, तब बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपना कर्ज वापस मांगने की प्रक्रिया शुरू की।

मार्च और अप्रैल 2018 में फायरस्टार समूह और नीरव मोदी को नोटिस भेजे गए थे, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद 8 मार्च 2024 को बैंक ऑफ इंडिया ने 4.1 मिलियन डॉलर की मूल राशि और ब्याज के लिए सारांश निर्णय हासिल किया।

बैंक ने अक्टूबर 2025 में नीरव मोदी को एक और भुगतान मांग भेजी थी। अदालत में इसी प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई।

कोर्ट ने गारंटी को माना वैध

न्यायाधीश टिंकलर ने अपने फैसले में कहा कि 17 फरवरी 2018 को नीरव मोदी ने बैंक को एक ईमेल भेजा था। इसमें उसने मीडिया में चल रही खबरों के कारण कारोबार बंद होने की स्थिति और समूह की ओर से बैंकों का बकाया चुकाने में असमर्थता की बात कही थी।

नीरव मोदी ने अप्रैल 2018 और अक्टूबर 2025 में भेजी गई मांगों को प्राप्त करने से इनकार किया था। लेकिन न्यायाधीश टिंकलर ने कहा कि दोनों मांगें उसे मिली थीं। अदालत ने व्यक्तिगत गारंटी को वैध और लागू करने योग्य मानते हुए बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाया।

फैसले के बाद अब नीरव मोदी पर बैंक की बकाया राशि चुकाने की जिम्मेदारी तय हो गई है।

Location :  New Delhi

Published :  24 June 2026, 10:09 AM IST

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