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दिल्ली के सेशंस कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से 1980 में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने वाले मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। कोर्ट ने इस अनुरोध को मानते हुए सुनवाई 7 फरवरी तक स्थगित कर दी।
सोनिया गांधी (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट के सेशंस कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से जुड़े वोटर लिस्ट मामले में सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है। कोर्ट ने सोनिया गांधी को याचिका का जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और अगली सुनवाई 7 फरवरी 2026 तक स्थगित कर दी।
मामला 1980 के वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम जुड़ने से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के वोटर लिस्ट में 1980 में शामिल किया गया था, जबकि वे उस समय भारत की नागरिक नहीं थीं। सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन अप्रैल 1983 में किया था। याचिका में आरोप है कि 1980 में उनका नाम जोड़ने के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए होंगे, जो कि एक संज्ञेय अपराध माना जाता है।
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इस मामले की शुरुआत वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका से हुई। याचिका में यह भी कहा गया कि सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट से 1982 में हटा दिया गया था और बाद में 1983 में फिर जोड़ा गया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सोनिया गांधी के नाम को 1980 में जोड़ने की प्रक्रिया कानून के खिलाफ है, क्योंकि वे उस समय भारतीय नागरिक नहीं थीं।
मामले पर सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी के वकील ने कहा कि दस्तावेज काफी पुराने हैं और उन्हें जवाब तैयार करने के लिए समय की आवश्यकता है। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुनवाई को 7 फरवरी तक स्थगित कर दिया।
इससे पहले, 11 सितंबर 2025 को एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका खारिज करने के आदेश के खिलाफ अपील के रूप में यह केस अब सेशंस कोर्ट में सुनवाई के लिए आया है। कोर्ट ने 9 दिसंबर 2025 को सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।
याचिका में कहा गया है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करना एक गंभीर अपराध है और इस पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट पर आरोप लगाया कि उसने इस मामले में न तो सोनिया गांधी को नोटिस दिया और न ही दिल्ली पुलिस को।
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सोनिया गांधी और कांग्रेस ने अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। इस मामले में राजनीतिक हलचल भी तेज है, क्योंकि यह मामला कांग्रेस अध्यक्ष और राष्ट्रीय राजनीति के एक बड़े चेहरे से जुड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने दस्तावेजों और समय सीमा के कारण मामला जटिल हो सकता है, और अदालत को यथासंभव सावधानीपूर्वक फैसला लेना होगा।
अब अदालत द्वारा अगली सुनवाई 7 फरवरी 2026 के लिए तय की गई है। इस दौरान सोनिया गांधी को अपनी ओर से जवाब दाखिल करने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा। इस केस के परिणाम पर राष्ट्रीय राजनीति में ध्यान रहेगा और यह कांग्रेस के लिए संवेदनशील मामला बना हुआ है।