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सुप्रीम कोर्ट
New Delhi: मणिपुर में जातीय हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में हुई अप्राकृतिक मौतों और यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर राज्य सरकार पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने मणिपुर सरकार से पूछा कि इन मामलों में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार कोर्ट को आदेश देने के लिए मजबूर न करे और बताए कि पीड़ितों के लिए क्या कार्रवाई की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने और राहत शिविरों में हुई संदिग्ध मौतों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने जस्टिस गीता मित्तल समिति की रिपोर्ट में सामने आए 25 से अधिक संदिग्ध और अप्राकृतिक मौतों के मामलों की जानकारी मांगी है। इसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौत के कारण और जांच से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि इतनी संख्या में मौतों के बावजूद सभी मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया।
पीठ ने यह भी पूछा कि पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवजे की राशि इतनी कम क्यों रही। रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में परिवारों को 20 हजार से 30 हजार रुपये तक की सहायता राशि दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि राहत शिविरों में हुई सभी संदिग्ध मौतों के मामलों में तत्काल FIR दर्ज की जाए।
अदालत ने कहा कि मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तेज जांच जरूरी है। साथ ही, राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की जांच के लिए 8 जिलों में 42 विशेष जांच टीमें (SIT) काम कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि कुल 3,020 मामलों की जांच चल रही है। इनमें से 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है।
पीड़ित पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि गुवाहाटी की विशेष अदालत में सप्ताह में सीमित दिनों तक सुनवाई हो रही है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सीबीआई मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए दो विशेष अदालतें स्थापित करने की संभावना पर विचार करने को कहा है।
Location : Manipur
Published : 17 September 2026, 3:27 PM IST
Topics : CJI Surya Kant Manipur Ethnic Violence Manipur Relief Camps Manipur Violence Case Supreme Court Manipur Hearing