Chaibasa: भूखे रहने की आई नौबत तो किया हड़ताल, स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडराया संकट

झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों का धैर्य जवाब देता नजर आ रहा है। महीनों से मानदेय नहीं मिलने और अन्य समस्याओं से परेशान चालक अब सड़क पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि आर्थिक तंगी के बीच काम करना मुश्किल हो गया है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 25 June 2026, 5:24 PM IST
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Chaibasa: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। पहले से ही अनुबंधित स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल के बीच अब 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े चालक और कर्मचारी भी आंदोलन पर उतर आए हैं। पश्चिमी सिंहभूम जिले में संचालित 108 एंबुलेंस के चालक गुरुवार को सिविल सर्जन कार्यालय के पास धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

कर्मचारियों का कहना है कि लगातार तीन माह से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

"बिना वेतन के काम करना मुश्किल"

108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने बताया कि झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन वर्तमान में पटना स्थित सम्मान फाउंडेशन के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के चालकों को पिछले तीन महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि कई कर्मचारियों के घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है। बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और अन्य जिम्मेदारियां निभाना कठिन हो गया है। ऐसे में कर्मचारियों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। संघ ने साफ कहा है कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया जाएगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

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एंबुलेंस की कमी से बढ़ रही परेशानी

कर्मचारियों ने केवल वेतन भुगतान का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि जिले में एंबुलेंस की कमी पर भी सवाल खड़े किए। शैलेंद्र महतो के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जैसे बड़े जिले में जितनी एंबुलेंस की जरूरत है, उतनी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केवल सात से आठ एंबुलेंस ही संचालित हो रही हैं। इनमें से कई वाहनों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। कई बार गाड़ियां कुछ दूरी चलने के बाद ही तकनीकी खराबी का शिकार हो जाती हैं, जिससे मरीजों को समय पर सहायता पहुंचाने में दिक्कत होती है।

मरम्मत और ईंधन की समस्या भी बनी मुसीबत

संघ के सचिव राजेश गोप ने कहा कि एंबुलेंस की समय पर मरम्मत नहीं कराई जाती। कई वाहन खराब हालत में सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके अलावा ईंधन की समस्या भी लगातार बनी हुई है। उन्होंने बताया कि कई बार एंबुलेंस चालकों को तेल भरवाने के लिए तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में आपातकालीन सेवाओं का संचालन प्रभावित होना स्वाभाविक है।

राजेश गोप का कहना है कि जब मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलती तो उनका गुस्सा सबसे पहले चालकों पर निकलता है, जबकि कई समस्याएं उनके नियंत्रण से बाहर होती हैं।

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कॉल सेंटर व्यवस्था पर भी उठे सवाल

कर्मचारियों ने यह भी बताया कि 108 एंबुलेंस सेवा का कॉल ऑपरेशन रांची से संचालित होता है। कई बार घटनाओं की सूचना चालक तक देर से पहुंचती है, जिससे मौके पर पहुंचने में समय लग जाता है। उनका कहना है कि हर देरी के लिए चालकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। चालक अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं कि मरीजों और दुर्घटना पीड़ितों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाए।

आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल हुए कर्मचारी

गुरुवार को हुए प्रदर्शन में पश्चिमी सिंहभूम जिले के 30 से अधिक चालक और कर्मचारी शामिल हुए। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। फिलहाल हड़ताल जारी है।

Location :  Chaibasa

Published :  25 June 2026, 5:24 PM IST

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