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घोरमारा के पेड़ा कारोबारियों की बढ़ी चिंता (Img: Dynamite News)
Deoghar: देवघर की पहचान सिर्फ बाबा बैद्यनाथ धाम से नहीं, बल्कि यहां के प्रसिद्ध घोरमारा पेड़ा से भी जुड़ी हुई है। हर साल सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के बाद यहां का पेड़ा प्रसाद के रूप में लेकर जाते हैं। लेकिन सावन 2026 से पहले इस पारंपरिक मिठास पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
कारोबारियों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य, गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें और वर्षों से स्थिर सरकारी दर उनके लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इस बार सावन में कारोबार पर भारी असर पड़ सकता है।
देवघर-बासुकीनाथ मार्ग पर स्थित घोरमारा का पेड़ा अपनी शुद्धता और स्वाद के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। सावन के दौरान यहां की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। सामान्य दिनों की तुलना में इस अवधि में बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, पूरे साल की कमाई का बड़ा हिस्सा इन्हीं दिनों में मिलता है। यही कारण है कि सावन का महीना इस उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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घोरमारा पेड़ा उद्योग केवल एक व्यापार नहीं बल्कि सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का साधन है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लगभग 200 से 250 परिवार सीधे इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा दूध आपूर्ति करने वाले किसान, मजदूर, पैकेजिंग से जुड़े कर्मचारी और परिवहन सेवाएं भी इसी उद्योग पर निर्भर हैं। अनुमान है कि सावन के दौरान यहां करोड़ों रुपये का कारोबार होता है, जो पूरे साल की आर्थिक रीढ़ बनता है।
व्यापारियों का कहना है कि वर्ष 2025 के सावन मेले में दुमका-देवघर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य और रूट डायवर्सन के कारण बड़ा नुकसान हुआ था। श्रद्धालुओं की आवाजाही वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ दी गई थी, जिससे घोरमारा होकर गुजरने वाले यात्रियों की संख्या कम हो गई। इसका सीधा असर पेड़ा बिक्री पर पड़ा और कारोबार में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। कई दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।
इस बार भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। बासुकीनाथ-देवघर मार्ग पर निर्माण कार्य अभी भी जारी है। ऐसे में व्यापारियों को डर है कि अगर फिर से रूट डायवर्सन किया गया तो पिछले साल जैसी स्थिति दोहराई जा सकती है। व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं आया है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।
पेड़ा निर्माण में दूध, चीनी और ईंधन सबसे बड़ी लागत वाले घटक हैं। कारोबारियों के अनुसार गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने उत्पादन लागत को काफी बढ़ा दिया है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जो सिलेंडर पहले करीब 1000 रुपये में मिल जाता था, वही अब कई बार 2000 से 2500 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है। इससे मुनाफा घटता जा रहा है और लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
वर्तमान में पेड़ा की सरकारी दर लगभग 360 से 400 रुपये प्रति किलो है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती लागत के मुकाबले यह दर बहुत कम है। उनकी मांग है कि कम से कम 50 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की जाए ताकि बढ़े हुए खर्च का कुछ संतुलन बन सके।
घोरमारा पेड़ा व्यवसायी संघ के अध्यक्ष अश्वनी मंडल ने कहा कि यदि इस बार भी हालात नहीं सुधरे तो छोटे कारोबारियों की स्थिति और खराब हो जाएगी। अब सभी की निगाह जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी है। एक तरफ सावन में लाखों श्रद्धालुओं के आने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ मिठास बांटने वाले ये कारोबारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
Location : Deoghar
Published : 25 June 2026, 5:44 PM IST