दर्द पर मरहम या जेब पर नया वार? हिमाचल में तेल पर लगा ‘अनाथ-विधवा सेस’, जानिए क्यों मचा बवाल और क्या हैं नई कीमतें

हिमाचल में सुक्खू सरकार ने अनाथ बच्चों व विधवाओं के कल्याण के लिए पेट्रोल-डीजल पर 60 पैसे 'अनाथ एवं विधवा सेस' लगाया है। शिमला में पेट्रोल 103.05 रुपये हुआ। इस मानवीय पहल पर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है, जानिए क्या हैं नई कीमतें।

Updated : 12 August 2026, 8:55 AM IST
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Shimla: हिमाचल प्रदेश में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो गया है। राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। यह बदलाव एक खास सामाजिक उद्देश्य के तहत किया गया है, जिसके चलते अब आम आदमी की जेब पर थोड़ा और बोझ बढ़ गया है।

क्यों और कैसे बढ़ा ईंधन का दाम?

राज्य सरकार ने प्रदेश के अनाथ बच्चों और बेसहारा विधवाओं के कल्याण के लिए धन जुटाने का बीड़ा उठाया है। इसी नेक मकसद को पूरा करने के लिए सरकार ने ‘अनाथ एवं विधवा सेस’ (उपकर) लागू किया है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग की अधिसूचना के अनुसार, यह नया सेस हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (VAT) अधिनियम, 2005 की धारा 6-ए के तहत लगाया गया है। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की पहली बिक्री (पॉइंट ऑफ फर्स्ट सेल) पर यह अतिरिक्त टैक्स वसूला जाएगा।

शिमला में अब क्या हुई नई कीमत?

इस नए उपकर के लागू होने के बाद राजधानी शिमला में गाड़ी चालकों को अब ज्यादा कीमत चुकानी होगी। शिमला में जो पेट्रोल पहले 102.45 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, वह अब बढ़कर 103.05 रुपये प्रति लीटर हो गया है। ठीक इसी प्रकार, डीजल के दामों में भी 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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बजट सत्र में पास हुआ था खास कानून

यह पूरा फैसला इस साल के बजट सत्र के दौरान आए हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत लिया गया है। इस विधेयक ने सरकार को पेट्रोल और डीजल पर अधिकतम 5 रुपये प्रति लीटर तक का सेस लगाने की कानूनी ताकत दी थी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उस दौरान स्पष्ट किया था कि कानून में सीमा 5 रुपये जरूर है, लेकिन इसे कितना लगाना है, यह सरकार अपने विवेक से तय करेगी। शुरुआत में इसे केवल 60 पैसे प्रति लीटर ही रखा गया है।

सरकार की नीयत और विपक्ष का विरोध

इस नए टैक्स को लेकर राजनीतिक पारा भी हाई हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का मानना है कि समाज के सबसे कमजोर और लाचार वर्गों की मदद के लिए हर नागरिक को आगे आना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से अपील की थी कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने के बजाए समर्थन मिलना चाहिए।

दूसरी ओर, विपक्ष और भाजपा नेता जय राम ठाकुर ने इस फैसले पर तीखा वार किया है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार अपनी वित्तीय कमियों को छिपाने और रेवेन्यू इकट्ठा करने के लिए अनाथों और विधवाओं के नाम का इस्तेमाल कर रही है, जो कि बिल्कुल सही नहीं है।

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आम जनता का असर

एक तरफ जहां सरकार का यह कदम मानवीय दृष्टिकोण से एक बड़ी और सराहनीय पहल माना जा रहा है, जिससे जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद मिलेगी; वहीं दूसरी तरफ महंगाई से जूझ रहे आम आदमी के लिए यह किसी छोटे झटके से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस सेस से इकट्ठा होने वाला पैसा किस प्रकार धरातल पर अनाथों और विधवाओं के जीवन में उजाला लेकर आता है।

Location :  Shimla

Published :  12 August 2026, 8:55 AM IST

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