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सूरजकुंड मेले के लिए शनिवार दिन हादसों का रहा.. झूला टूटने से कुछ समय पहले भी एक हादसा हुआ था। बता दें कि साल 2001 में सबसे भयंकर हादसा हुआ था..जब तकनीकी कमी आने के बाद झूला हवा में ही लटक गया था..और फिर जमीन पर आकर धड़ाम से जा गिरा था..उस समय हादसे में एक 8 साल की बच्ची समेत 3 लोगों की जान चली गई थी।
सूरजकुंड मेले में हादसा
Faridabad News: फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में झूला टूटने से बड़ा हादसा हो गया..जिसके चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई..मृतक पुलिस कर्मी बताया जा रहा है..जो कि मेले में ड्यूटी पर तैनात था.. वहीं हादसें में 13 लोग घायल भी हो गए..सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया..आपको बता दें कि शनिवार शाम अचानक झूला टूटने से मेल में अफरा-तफरी फैल गई..जिसके बाद लोग इधर-उधर दौड़ने लगे..हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने हादसे को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से शोक प्रकट किया है..वहीं हादसे को लेकर त्वरित कार्रवाई करने और तेजी से राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं..
रौनक का माहौल बदला मातम में
हरियाणा के फरीदाबाद के सूरजकुंड में हर साल मेले का आय़ोजन किया जाता है..जिसके चलते देश-दुनिया से लोगों की भीड़ मेले का आकर्षण देखने के लिए उमड़ती है..वहीं इस साल के सूरजकुंड मेले की शुरुआत अभी कुछ दिन पहले हुई है,जिसके कारण रोजाना लोगों भारी तादाद में पहुंच रहे हैं..वहीं शनिवार भी मेले में देर शाम लोगों का बड़ी संख्या में हुजूम उमडा हुआ था..तभी अचानक सूनामी नाम के एक झूले का संतुलन बिगड़ गया..और उसका एक पिल्लर जमीन पर आ गिरा..झूला गिरने से उसमें सवार सभी लोग नीचे जमीन पर आ गिरे..हादसे के वक्त झूले में करीब 15 लोग सवार थे.जिन्हें गंभीर चोटें आई हैं. वहीं दुर्घटना के बाद बचाव के लिए पहुंचे पुलिस कर्मी पर झूले का टुकड़ा गिरने से मौत हो गई..सूरज कुंड मेले में जहां कुछ समय पहले रौनक लगी हुई थी..वहीं हादसा हो जाने के बाद चंद पलों में ही मातम का साया छा गया..
झूला टूटने से कुछ समय पहले भी हुआ हादसा
सूरजकुंड मेले के लिए शनिवार दिन हादसों का रहा..आपको बता दें कि झूला टूटने से कुछ समय पहले भी एक हादसा हुआ था..जिसमें दो लोग घायल हुए थे..मेले में बने फूड कोर्ट का भारी भरकम स्वागत द्वारा अचानक से हवा के साथ नीचे गिर गया था..जिसके चलते दो लोग मौके पर घायल हो गए थे..घायलों में एक मासूम बच्चा भी था..जिसको गंभीर चोटें आई थी..वहीं इसके ठीक बाद एक झूले का बैलेंस बिगड़ गया..और फिर से हादसा हो गया..
मेले का है हादसों से पुराना नाता
सूरजकुंड मेले में हादसा होना कोई नयी बात नहीं है..आपको बता दें कि इससे पहले के मेलों में भी कई बार भीषण हादसे हो चुके हैं.अतीत के पन्नों पर नजर डाले तो साल 2001 में सबसे भयंकर हादसा हुआ था..जब तकनीकी कमी आने के बाद झूला हवा में ही लटक गया था..और फिर जमीन पर आकर धड़ाम से जा गिरा था..उस समय हादसे में एक 8 साल की बच्ची समेत 3 लोगों की जान चली गई थी..सूरज कुंड मेले 2001 का झूला हादसा सबसे भंयकर बताया जाता है..वहीं कुछ साल पहले मेले में आगजनी भी हुई थी..जिसमें शिल्पकारों की फूस की छत वाली स्टाल जलकर खाक हो गई थी..मेले में भीड़ के चलते भी कई बार हादसे दस्तक दे चुके हैं..
प्रशासन पर उठे सवाल
मेले में एक ही दिन में दो हादसे होने के बाद मेला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं..वहीं सीएम सैनी भी इन हादसों को लेकर गंभीर नजर आ रहे है,,और इसी के चलते उन्होंने प्रशासन को मामले की जांच करके जिम्मेदार अधिकारियो पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं..आपको बता दें कि सूरजकुंड़ मेले में कुछ ही समय के अंतराल में हुए दो हादसों ने हड़कंप मचा दिया है..और साथ ही मेले को लेकर लोगों के मन में दहशत मचा दी है..
सूरजकुंड मेले का इतिहास
हरियाणा के फरीदाबा में लगने वाला सूरजकुंड मेला 80 के दशक में शुरु किया गया था..सूरजकुंड तालाब के नाम पर रखे इस मेले का आरंभ कुशल कारीगरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया था..2013 तक सूरजकुंड मेला केवल भारत की ही पहचान था..लेकिन साल 2013 में मेले को नई उड़ान देते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपग्रेड कर दिया गया..मेले की खासियत है कि हर साल इस मेले की थीम भारत के एक राज्य की संस्कृति और कला के आधार पर तय होती है..वहीं साथ ही किसी एक देश को पार्टनर नेशन के रुप में भी चुना जाता है..और फिर पार्टनर देश भी भाग लेकर अपनी संस्कृति से मेले में पहुचंने वाले लोगों से परिचित कराता है..