देश की अदालतें होंगी हाईटेक! CJI ने शुरू की बड़ी तैयारी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालतों के आधुनिकीकरण और 50,000 करोड़ का फंड जुटाने के लिए एक समिति का गठन किया है। इसका उद्देश्य त्वरित न्याय सुनिश्चित करना और बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 13 May 2026, 10:05 AM IST
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New Delhi: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालतों के आधुनिकीकरण और 50,000 करोड़ का फंड जुटाने के लिए एक समिति का गठन किया है। इसका उद्देश्य त्वरित न्याय सुनिश्चित करना और बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने देश भर की अदालतों की इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) से संबंधित जरूरतों का आकलन करने और न्यायपालिका के लिए ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ तक के विशेष सरकारी आवंटन का प्रस्ताव तैयार करने के लिए एक 'न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर सलाहकार समिति' का गठन किया है। इस समिति को न्याय वितरण प्रणाली की आवश्यकताओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और इसे 31 अगस्त तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल को सौंपने का कार्य सौंपा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार इस समिति की अध्यक्षता करेंगे। समिति के अन्य सदस्यों में कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवांशु बसाक, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा, बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेशन, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के महानिदेशक और सुप्रीम कोर्ट के महासचिव शामिल हैं।

समिति से कहा गया है कि वह न्याय वितरण प्रणाली में शामिल हितधारकों (stakeholders) के सामने आने वाले मुद्दों पर विचार करे और न्यायाधीशों, वकीलों, वादियों और आगंतुकों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने के उपायों की सिफारिश करे।

समिति मामलों के निपटारे में तेजी लाने, कंप्यूटरीकरण और ई-अदालतों जैसी पहलों का विस्तार करने, और अदालतों में दायर मामलों के डिजिटल प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों का भी पता लगाएगी। इसके अलावा, समिति डिजिटल विभाजन (digital divide) को पाटने के लिए नागरिक-केंद्रित सेवाओं को बेहतर बनाने, आधुनिक अदालत परिसरों की योजना बनाने, और न्यायिक अधिकारियों तथा अदालत के कर्मचारियों के लिए काम करने की स्थितियों को बेहतर बनाने पर सुझाव देगी।

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यह कदम अदालतों में लंबित मामलों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच उठाया गया है। मार्च 2026 के अंत तक, सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 93,143 हो गई थी। यह फरवरी 2026 की तुलना में 1,141 मामलों की वृद्धि को दर्शाता है। इस महीने की शुरुआत में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले को न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम बताया।

Location :  New Delhi

Published :  13 May 2026, 8:00 AM IST

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