सिर्फ कार धमाका नहीं, बहुत बड़ी तबाही का प्लान था! लाल किला ब्लास्ट मामले में UN रिपोर्ट ने आतंकी सच का किया बड़ा खुलासा

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुआ विनाशकारी धमाका अल-कायदा (AQIS) की साजिश थी। एनआईए इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। जानिए कैसे वैश्विक आतंकी नेटवर्क भारत को निशाना बना रहा है।

Updated : 13 August 2026, 10:59 AM IST
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New Delhi: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक ताजा और बेहद संवेदनशील रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए विनाशकारी धमाके के लिए कुख्यात आतंकी संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) सीधे तौर पर जिम्मेदार था। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारत में इस हाई-प्रोफाइल मामले की चल रही जांच को एक नया और अंतरराष्ट्रीय आयाम मिल गया है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि एक्यूआईएस अब केवल एक पारंपरिक आतंकी संगठन नहीं रहा, बल्कि यह एक विकेंद्रीकृत नेटवर्क में तब्दील हो चुका है, जो पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में छोटी-छोटी खुफिया इकाइयों यानी 'सेल्स' के माध्यम से अपनी हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।

अफगानिस्तान और बांग्लादेश में पैर पसार रहा नेटवर्क

यूएन की इस विस्तृत रिपोर्ट में इस बात पर भी गहरी चिंता जताई गई है कि यह आतंकी संगठन तेजी से अपनी पहुंच बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, एक्यूआईएस के कई शीर्ष आतंकवादी वर्तमान में अफगानिस्तान में शरण लिए हुए हैं और वे स्थानीय अफगानी पहचान-पत्रों का धड़ल्ले से इस्तेमाल करके अपनी साजिशों को अमलीजामा पहना रहे हैं। इसके अलावा, यह संगठन पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी अपने ऑपरेशन और कट्टरपंथी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि यह संगठन स्थानीय पनाहगाहों का इस्तेमाल कर अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है।

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केमिकल हथियारों और डिजिटल करेंसी का बढ़ता खतरा

सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर मंडरा रहे बड़े और नए आतंकी खतरों को लेकर भी कड़ी चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे खतरनाक आतंकवादी समूह अब केमिकल और बायोलॉजिकल मटीरियल हासिल करने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यदि इन समूहों के हाथ इस प्रकार की सामग्रियां लग जाती हैं, तो यह पूरी मानवता के लिए एक भयंकर आपदा साबित हो सकती है। इसके साथ ही, आतंकवादी फंडिंग के तरीकों में भी बड़ा बदलाव आया है। ये संगठन अपनी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और उसे एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर करने के वास्ते डिजिटल करेंसी (क्रिप्टोकरेंसी) का सहारा ले रहे हैं। इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए यूएन निगरानी टीम ने सुझाव दिया है कि प्रतिबंधित आतंकवादी समूहों से जुड़े क्रिप्टोकरेंसी एड्रेस को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में तत्काल शामिल किया जाना चाहिए।

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एनआईए कर रही है इस वीभत्स मामले की जांच

गौरतलब है कि नवंबर 2025 में लाल किले के नजदीक हुए इस शक्तिशाली कार धमाके ने पूरे देश को दहला दिया था। इस दर्दनाक घटना में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी और 20 से अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। शुरुआत से ही भारतीय जांच एजेंसियों ने इसे एक सुनियोजित आतंकी साजिश के रूप में देखा और मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी कमान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई। अब संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने भारतीय जांचकर्ताओं के उन शुरुआती संदेहों पर पक्की मुहर लगा दी है, जिनमें इस घटना के पीछे किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क के हाथ होने की आशंका जताई गई थी। भारतीय एजेंसियां इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए उन कट्टरपंथी पेशेवरों और एक्यूआईएस से जुड़े संदिग्धों के नेटवर्क को खंगाल रही हैं, जिन्होंने इस कायराना हमले को अंजाम दिया था।

Location :  New Delhi

Published :  13 August 2026, 10:57 AM IST

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