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दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। पर्यावरण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, जब भी राजधानी में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-III (गंभीर) और चरण-IV (अति गंभीर) लागू होगा, तब दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर वाहन पार्किंग शुल्क दोगुना वसूला जाएगा।
दिल्ली में महंगी हुई पार्किंग
New Delhi: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। पर्यावरण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, जब भी राजधानी में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-III (गंभीर) और चरण-IV (अति गंभीर) लागू होगा, तब दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर वाहन पार्किंग शुल्क दोगुना वसूला जाएगा। इस कदम का उद्देश्य निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है।
मेट्रो पार्किंग को मिलेगी पूरी छूट
हालांकि, इस आदेश से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के पार्क-एंड-राइड पार्किंग स्थलों को पूरी तरह छूट दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे लोग निजी वाहन घर पर छोड़कर मेट्रो का अधिक इस्तेमाल करेंगे, जिससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी और PM2.5 व PM10 जैसे खतरनाक प्रदूषक तत्वों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश
यह आदेश पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत जारी किया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। नगर निगम, स्थानीय निकायों और पार्किंग एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। आदेश का उल्लंघन करने पर धारा-15 के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।
वाहन प्रदूषण को बताया गया सबसे बड़ा कारण
उधर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण सबसे बड़ा कारण है। आयोग ने अदालत को जानकारी दी कि बढ़ते वाहनों की संख्या और ट्रैफिक जाम से प्रदूषण स्तर में लगातार इजाफा हो रहा है।
प्रदूषण कम करने के लिए दीर्घकालिक सुझाव
सीएक्यूएम ने वायु गुणवत्ता सुधार के लिए कई दीर्घकालिक उपायों की सिफारिश की है। इनमें उत्सर्जन क्षमता के आधार पर अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना, पीयूसी 2.0 प्रणाली को मजबूत करना और रिमोट सेंसिंग तकनीक से वाहनों की निगरानी शामिल है।
सार्वजनिक परिवहन और ई-वाहनों पर जोर
इसके अलावा, मेट्रो और क्षेत्रीय रेल नेटवर्क के विस्तार, मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के विकास, ई-बसों और सीएनजी बसों की संख्या बढ़ाने, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों के विस्तार की भी सिफारिश की गई है। पुराने वाहनों को कबाड़ में देने पर अधिक प्रोत्साहन राशि देने का सुझाव भी दिया गया है।
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यातायात और पार्किंग प्रबंधन पर फोकस
दिल्ली और एनसीआर में एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली लागू करने, पार्किंग क्षेत्र प्रबंधन योजनाएं लागू करने और पर्यावरण संरक्षण शुल्क बढ़ाने जैसे कदमों को भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी बताया गया है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से राजधानी की हवा को साफ करने में मदद मिलेगी।