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बजट सत्र के 13वें दिन लोकसभा और राज्यसभा में हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित रही। राहुल गांधी पर निशिकांत दुबे के आरोपों से सियासत गरमाई। विपक्ष ने हरदीप पुरी के इस्तीफे और आरक्षण बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
बजट सत्र के 13वें दिन हंगामा (Img- Internet)
New Delhi: संसद के बजट सत्र के 13वें दिन शुक्रवार को सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्षी सांसदों के जोरदार विरोध और नारेबाजी के कारण महज 10 मिनट में ही कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। वहीं राज्यसभा की कार्यवाही करीब दो घंटे तक चली। अब दोनों सदनों की कार्यवाही 9 मार्च से दोबारा शुरू होगी।
सदन शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के चलते स्पीकर को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 12 बजे जब सदन दोबारा शुरू हुआ तो शोर-शराबे के बीच शिक्षा और कानून मंत्रालय से जुड़े कुछ विधेयक पेश किए गए। इसके बाद चेयर पर मौजूद संध्या राय ने लोकसभा को 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया।
संसद का बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चला, जिसमें कुल 13 बैठकें हुईं। 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश हुआ और 1 फरवरी को आम बजट प्रस्तुत किया गया। 2 से 5 फरवरी तक राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जबकि 6 से 13 फरवरी तक बजट और विभिन्न मुद्दों पर बहस चली।
दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें कुल 17 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरान मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा, विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पर विचार और पारित किया जाएगा।
इसी बीच सियासी तापमान तब और बढ़ गया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि राहुल गांधी सत्ता पाने के लिए देश के विभाजन की योजना बना रहे हैं।
दुबे ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर लोकसभा में बहस की अनुमति मांगी है। साथ ही राहुल गांधी के खिलाफ सब्सटेंसिव मोशन पेश कर उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने और चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों ने प्रदर्शन किया और हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग उठाई। यह विरोध राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों के संदर्भ में हुआ।
वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसदों ने भी प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी और ईबीसी वर्गों के लिए 65% आरक्षण की मांग की और इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की बात कही।
बजट सत्र के पहले चरण के अंतिम दिन पूर्व सांसद भगवान दास राठौर को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद हंगामे के कारण कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। सूचीबद्ध कार्यों के तहत शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, गृह, कानून, वाणिज्य और वस्त्र मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने थे।
अब 9 मार्च से शुरू होने वाले दूसरे चरण में सरकार के सामने अनुदान मांगों को पारित कराने और वित्तीय विधेयकों को मंजूरी दिलाने की चुनौती होगी, जबकि विपक्ष अपने मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख बनाए रखने के संकेत दे चुका है।