हिंदी
मनोज जरांगे का अनशन खत्म (Img- X)
Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति और मराठा आरक्षण की लड़ाई में एक नया मोड़ सामने आया है। बीते 20 दिनों से लगातार आमरण अनशन पर बैठे मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल ने आखिरकार अपनी भूख हड़ताल आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दी है। बीड जिले के पाटोदा में देर रात करीब 2 बजे अपने हजारों समर्थकों की मौजूदगी में उन्होंने जूस पीकर अनशन तोड़ा।
डॉक्टरों की लगातार मिलती चेतावनी, गिरते स्वास्थ्य और सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। लेकिन जरांगे ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन खत्म नहीं, बल्कि 3 महीने (90 दिन) के लिए स्थगित हुआ है।
मनोज जरांगे ने इससे पहले मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में लाखों मराठा समर्थकों के साथ पहुंचकर सीधे प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी। इस चेतावनी से राज्य प्रशासन में हड़कंप मच गया था। स्थिति को संभालते हुए राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल, जिसमें मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, दादा भुसे और भाजपा नेता प्रसाद लाड शामिल थे, ने जरांगे से मुलाकात की।
मराठा आरक्षण पर फिर गरमाया महाराष्ट्र, मनोज जरांगे के आमरण अनशन से बढ़ी सरकार की चुनौती
लंबी चर्चा के बाद जरांगे ने मुंबई कूच का इरादा फिलहाल टाल दिया। हालांकि, उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यह सरकार को दिया गया आखिरी मौका है। अगर अगले 3 महीनों में मांगें पूरी नहीं हुईं, तो पूरा मराठा समाज अपने परिवारों के साथ मुंबई का रुख करेगा।
इस पूरे आंदोलन की सबसे मुख्य मांग पात्र मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करना है, ताकि उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिल सके। इसके अतिरिक्त, मराठा समाज सतार, कोल्हापुर और हैदराबाद रियासत के पुराने गजट को तुरंत प्रभाव से लागू करने पर अड़ा हुआ है।
जरांगे का कहना है कि जब तक सभी पात्र मराठाओं को उनका कानूनी हक नहीं मिल जाता, तब तक वे शांत बैठने वाले नहीं हैं और 90 दिनों की यह समयसीमा सरकार के लिए एक तरह से परीक्षा की घड़ी है।
दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद संजीदगी से कदम आगे बढ़ाए हैं। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि पाए गए 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड्स में किसी भी तरह की कटौती या कमी नहीं की जाएगी।
मराठा आरक्षण पर सरकार का बड़ा फैसला, मंजूर हुई मांगें; मनोज जरांगे ने खत्म किया अनशन
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार पहले दिन से ही संवाद के लिए तैयार रही है और जरांगे पाटिल की अधिकतर मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार कर रही है। अब देखना यह होगा कि अगले 90 दिनों के भीतर सरकार किस तरह मराठा समुदाय की मांगों को कानूनी अमलीजामा पहनाती है।
Location : Mumbai
Published : 17 September 2026, 10:05 AM IST