समधी जी जरा बच के, कहीं समधन गाली से लूट न ले इज्जत! जानें क्यों यूपी-बिहार की शादियों में पर्दे के पीछे महिलाएं गाती हैं ये गीत

बिहार की शादियों में गारी गीतों की परंपरा अनोखी है, जहां महिलाएं हंसी-मजाक और प्यार भरी नोकझोंक के जरिए दूल्हे और उसके रिश्तेदारों पर मजाकिया तंज कसती हैं।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 18 September 2026, 5:32 PM IST
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New Delhi: सोचिए... एक तरफ दूल्हा घोड़ी पर बैठकर दुल्हन के घर पहुंचा है, दूसरी तरफ उसके घरवाले खुशी-खुशी खाने की तैयारी में बैठे हैं। तभी अचानक दुल्हन पक्ष की महिलाओं की टोली गीत छेड़ देती है। बोल सुनकर लगता है जैसे समधी से लेकर दूल्हे तक किसी की खैर नहीं; लेकिन यहां मामला लड़ाई का नहीं बल्कि हंसी-मजाक और प्यार भरी नोकझोंक का है।

बिहार की शादियों में गाए जाने वाले इन खास लोकगीतों को ‘गारी गीत’ कहा जाता है। नाम में भले ही ‘गारी’ हो, लेकिन पारंपरिक रूप से इनका मकसद किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि शादी के माहौल में ठिठोली और मनोरंजन करना रहा है।

दूल्हे से लेकर समधी तक, कोई नहीं बचता

गारी गीत में दुल्हन पक्ष की महिलाएं दूल्हे के साथ-साथ उसके पिता, चाचा और अन्य पुरुष रिश्तेदारों पर मजाकिया तंज कसती हैं। कभी वे दूल्हे के रूप-रंग का मजाक उड़ाती हैं, तो कभी उसके शरीर-गठन या खाने-पीने की आदतों को गीतों का विषय बनाती हैं।

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सबसे मजेदार पल तब आता है जब शादी के मेहमान (बाराती) खाना खाने बैठते हैं। एक तरफ या पर्दे के पीछे बैठकर महिलाएं ऐसे गीत गाती हैं जिनमें दूल्हे के पिता और मेहमानों को निशाना बनाया जाता है। ढोलक की थाप या धातु की थाली की लयबद्ध आवाज के साथ यह रस्म जल्द ही शादी के जश्न का मुख्य आकर्षण बन जाती है।

एक महिला के बाद पूरी टोली संभाल लेती है मोर्चा

गारी गीत अकेले गाने की परंपरा नहीं है; महिलाएं इन्हें समूह में गाती हैं। एक महिला गाना शुरू करती है और बाकी महिलाएं उसके साथ सुर मिलाकर गाती हैं। फिर वे बारी-बारी से दूल्हे और उसके रिश्तेदारों पर मजाकिया ताने कसती हैं। इसीलिए ये गीत न केवल शब्दों को बल्कि महिलाओं की सामूहिक खुशी और बेझिझक हंसी को भी दर्शाते हैं।

राम-सीता के विवाह तक पहुंचती है कहानी

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गारी गीतों की परंपरा भगवान राम और माता सीता की शादी से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब भगवान राम की बारात मिथिला पहुंची, तो वहां की महिलाओं ने दूल्हे पक्ष का मजाक उड़ाने के लिए ऐसे गीत गाए जिनमें हंसी-मजाक और व्यंग्य भरा होता था।

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समय के साथ मिथिला की यह लोक परंपरा बिहार के अलग-अलग हिस्सों में फैल गई और शादी-ब्याह के जश्न का एक अहम हिस्सा बन गई। हालांकि, इसके ऐतिहासिक मूल और शुरुआत को लेकर अलग-अलग राय हैं।

पहले मीठा तंज, अब बदल गए बोल

पारंपरिक गारी गीतों की खासियत उनमें मौजूद हंसी-मजाक और हास्य था। हालांकि, समय के साथ इनके बोल बदलते गए हैं। कई जगहों पर अब इन गीतों में ऐसी अश्लील भाषा या अपशब्द शामिल हो गए हैं जिन्हें आम बातचीत में बुरा माना जाएगा।

गारी गीतों को लेकर लोगों की राय अलग-अलग है। फिर भी अपने पारंपरिक रूप में इन गीतों का मकसद रिश्तों में कड़वाहट पैदा करना नहीं, बल्कि शादी के जश्न में हंसी-मजाक का रंग भरना है ऐसे पल बनाना जिनमें ससुराल वाले भी उस हंसी-मजाक का हिस्सा बन सकें।

Location :  New Delhi

Published :  18 September 2026, 5:25 PM IST

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