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ट्रेन के नियम (Img- AI)
New Delhi: ट्रेन से रात का सफर जितना आरामदायक हो सकता है, नियमों की अनदेखी के चलते यह उतना ही परेशानी भरा भी बन सकता है। भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे के बीच ट्रेन के कोच की सभी मेन लाइट्स पूरी तरह बंद रखनी होती हैं।
इस समय सीमा के दौरान सिर्फ डिब्बे में लगा 'नाइट बल्ब' या हल्की नीली बत्ती ही चालू रखी जा सकती है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि सफर कर रहे सभी यात्रियों की नींद में कोई खलल न पड़े और वे बिना किसी परेशानी के आराम कर सकें।
अक्सर कई यात्रियों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर रात के समय उन्हें कोई जरूरी काम करना हो, खाना खाना हो या किताबें पढ़नी हों, तो वे क्या करें? इसके लिए रेलवे ने बहुत ही व्यावहारिक समाधान दिया है।
एसी और स्लीपर कोचों में हर सीट के पास एक छोटी 'रीडिंग लाइट' लगी होती है। रात 10 बजे के बाद आप इस पर्सनल लाइट का इस्तेमाल आसानी से कर सकते हैं। इसकी रोशनी सीमित होती है, जिससे पास में सो रहे अन्य यात्रियों की नींद बिल्कुल प्रभावित नहीं होती।
शांतिपूर्ण सफर बनाए रखने के लिए रेलवे ने केवल रोशनी ही नहीं, बल्कि शोर-शराबे को लेकर भी सख्त गाइडलाइंस लागू की हैं। रात 10 बजे के बाद कोई भी यात्री अपने मोबाइल पर बिना ईयरफोन या हेडफोन के तेज आवाज में गाने नहीं सुन सकता और न ही वीडियो देख सकता है।
इसके अलावा, फोन पर जोर-जोर से बातें करने पर भी मनाही है। यदि कोई यात्री इस नियम का उल्लंघन करता है, तो साथी यात्री 139 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद आरपीएफ (RPF) दोषी यात्री पर कानूनी कार्रवाई या जुर्माना लगा सकती है।
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रेलवे नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच TTE (ट्रैवलिंग टिकट परीक्षक) भी आपकी नींद खराब कर टिकट चेक नहीं कर सकते। इस समय सीमा में टिकट चेकिंग की सख्त मनाही होती है ताकि यात्री आराम से सो सकें। हालांकि, यह छूट उन यात्रियों पर लागू नहीं होती जो रात 10 बजे के बाद ही किसी मध्यवर्ती स्टेशन से ट्रेन में सवार हुए हों। ऐसे यात्रियों का टिकट बोर्डिंग के समय चेक किया जा सकता है।
Location : New Delhi
Published : 17 September 2026, 1:16 PM IST