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धनबाद पुलिस लाइन स्थित पुलिस केंद्र में आदिवासी समाज के प्रमुख पर्व सरहुल को पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। इस मौके पर SSP प्रभात कुमार ने पूजा में शामिल होकर जिले की शांति और समृद्धि की कामना की। बाद में वे मंदार बजाते भी नजर आए, जिससे पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा।
धनबाद पुलिस लाइन में सरहुल की धूम
Dhanbad (Jharkhand): धनबाद पुलिस लाइन स्थित पुलिस केंद्र में आदिवासी समाज के प्रमुख पर्व सरहुल का आयोजन पूरे उत्साह, उमंग और पारंपरिक रंग के साथ किया गया। इस खास मौके पर पुलिस महकमे का माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया। कार्यक्रम में एसपी ट्रैफिक, डीएसपी साइबर समेत कई वरीय पुलिस पदाधिकारी और बड़ी संख्या में जवान मौजूद रहे। सरहुल पर्व के बहाने पुलिस लाइन में न सिर्फ आदिवासी परंपरा का सम्मान देखने को मिला, बल्कि एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक जुड़ाव की खूबसूरत तस्वीर भी सामने आई।
विधि-विधान से हुई पूजा, शांति और खुशहाली की कामना
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। इस दौरान धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने भी पूरे श्रद्धा भाव से पूजा में हिस्सा लिया और जिले में शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। सरहुल प्रकृति, पेड़-पौधों और जीवन के नव उत्सव का पर्व माना जाता है, इसलिए आयोजन में पारंपरिक आस्था की गहरी छाप साफ दिखाई दी। पूजा स्थल पर मौजूद अधिकारी और जवान भी पूरे श्रद्धा भाव के साथ इस सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बने।
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ढोल-नगाड़ों की गूंज पर झूमे अधिकारी और जवान
पूजा के बाद पुलिस लाइन का माहौल पूरी तरह बदल गया और पूरा परिसर उत्सव की ऊर्जा से भर उठा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक गीतों की मधुर धुन और सांस्कृतिक उमंग के बीच पुलिस अधिकारी और जवान झूमते नजर आए। सबसे खास बात यह रही कि एसएसपी प्रभात कुमार खुद मंदार बजाते दिखे। उनका यह अंदाज वहां मौजूद लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया। सरहुल पर्व के इस आयोजन में आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी, जिसने माहौल को और भी रंगीन और यादगार बना दिया।
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सांस्कृतिक आयोजन से बढ़ता है भाईचारा
इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन पुलिस बल के भीतर आपसी भाईचारा, सौहार्द और एकता को मजबूत करते हैं। उनका कहना था कि सरहुल सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, सामाजिक समरसता और सामूहिक खुशियों का प्रतीक है। कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों और जवानों ने एक-दूसरे को सरहुल की शुभकामनाएं दीं और मिलकर इस पारंपरिक पर्व की खुशियां साझा कीं। पुलिस लाइन में मनाया गया यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि वर्दी के भीतर भी संस्कृति, संवेदना और समाज से जुड़ाव की मजबूत धड़कन मौजूद है।