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यातुल्लाह अली खामेनेई (Img: Google)
New Delhi: पश्चिम एशिया के धधकते हालात और इजराइल-अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। अयातुल्लाह अली खामेनेई के बाद देश की अगली शक्ति संरचना किसके हाथ में होगी। यह सवाल सिर्फ तेहरान की गलियों में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में गूंज रहा है। एक ओर मिसाइलों की गड़गड़ाहट है तो दूसरी ओर देश के भीतर सत्ता के सर्वोच्च शिखर को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद।
ईरान का पावर स्ट्रक्चर इस समय संक्रमण काल से गुजर रहा है। संवैधानिक तौर पर अगले सुप्रीम लीडर के चुनाव तक अंतरिम व्यवस्था लागू होती है। इस दौरान मसूद पेजेश्कियान, चीफ जस्टिस गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई और गार्डियन काउंसिल के एक सदस्य मिलकर प्रशासन संभालेंगे। बताया जा रहा है कि मोहम्मद मोखबर संक्रमण काल में इस जिम्मेदारी को संभाल सकते हैं। उन्होंने पहले अंतरिम राष्ट्रपति की भूमिका भी निभाई है।
ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव सीधे जनता नहीं करती। यह जिम्मेदारी ‘असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स’ नामक संस्था के पास होती है। जिसमें 88 शिया धर्मगुरु सदस्य होते हैं। इनका चुनाव हर आठ साल में जनता करती है, लेकिन उम्मीदवारों को पहले गार्डियन काउंसिल की मंजूरी लेना जरूरी होता है।
ईरान की पावर स्ट्रक्चर में सबसे ऊपर सुप्रीम लीडर होता है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद इस पद पर सिर्फ दो लोग रहे हैं। अयातुल्लाह रूहोल्लाह खोमैनी और अली खामेनेई। सुप्रीम लीडर देश की रक्षा नीति तय करता है। सेना का कमांडर-इन-चीफ होता है और युद्ध या शांति का अंतिम फैसला ले सकता है। उसे न्यायपालिका, सरकारी मीडिया और IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) के शीर्ष अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार भी होता है।
सुप्रीम लीडर की ताकत सिर्फ पद तक सीमित नहीं है। उसके करीब 2 हजार प्रतिनिधि विभिन्न सरकारी विभागों में तैनात रहते हैं और सीधे उन्हें रिपोर्ट करते हैं। कई मामलों में इनकी ताकत मंत्रियों से भी ज्यादा मानी जाती है। यही वजह है कि खामेनेई के बाद भी ईरान की सत्ता व्यवस्था पहले से ही तैयार मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेतृत्व बदलेगा लेकिन सिस्टम अचानक नहीं बदलेगा।
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ईरान का सत्ता ढांचा ऐसा बुना गया है कि व्यक्ति बदल सकता है लेकिन सिस्टम की जड़ें लगभग अडिग हैं। 2 हजार प्रतिनिधियों का जाल और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की लोहे जैसी पकड़ सुनिश्चित करती है कि सुप्रीम लीडर की कुर्सी खाली होते ही तंत्र खुद को संभाल ले। अंतरिम जिम्मेदारी मोहम्मद मोखबर जैसे चेहरों पर हो सकती है लेकिन असली चुनौती उस शख्सियत को ढूंढने की है। जिसके पास खामेनेई जैसा रसूख और धार्मिक स्वीकार्यता हो।
Location : New Delhi
Published : 5 March 2026, 4:35 AM IST