US Trade Policy: ट्रंप ने शुरू की नई ट्रेड रणनीति, भारत सहित 16 देशों पर फिर लटकी टैरिफ की तलवार?

अमेरिका ने भारत, चीन और यूरोपीय संघ समेत 16 देशों के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई ट्रेड जांच शुरू की है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि ये देश सब्सिडी और सस्ते निर्यात से अमेरिकी बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। इससे भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 12 March 2026, 9:30 AM IST
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Washington: वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Donald Trump के नेतृत्व वाली अमेरिकी प्रशासनिक टीम ने दुनिया के कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। अमेरिका ने भारत, चीन और यूरोपीय संघ सहित कुल 16 देशों के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई व्यापारिक जांच (ट्रेड इन्वेस्टिगेशन) शुरू करने का ऐलान किया है। इस कदम को वैश्विक व्यापार नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार और निर्यात पर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई रणनीति

दरअसल पिछले महीने 20 फरवरी को Supreme Court of the United States ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया था। अदालत ने राष्ट्रीय आपातकाल कानून के तहत लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था।

इसके बाद अमेरिकी सरकार ने Trade Act of 1974 के सेक्शन 122 का इस्तेमाल करते हुए 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लागू कर दिया। अब प्रशासन इस अस्थायी व्यवस्था से पहले नई जांच प्रक्रिया को पूरा करना चाहता है।

जुलाई से पहले पूरी होगी जांच

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव Jamieson Greer ने कहा है कि सेक्शन 301 के तहत शुरू की गई जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य जुलाई में अस्थायी टैरिफ की समयसीमा समाप्त होने से पहले जांच पूरी करना है। इस प्रक्रिया के तहत 15 अप्रैल तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं, जबकि 5 मई के आसपास औपचारिक सुनवाई आयोजित की जा सकती है।

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भारत समेत 16 देश जांच के दायरे में

अमेरिका का आरोप है कि कई देश अपनी घरेलू इंडस्ट्री और विनिर्माण क्षेत्र को भारी सरकारी सब्सिडी देकर अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। साथ ही जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर सस्ते दामों पर सामान अमेरिकी बाजार में भेजा जा रहा है, जिससे स्थानीय कंपनियों को नुकसान हो रहा है।

इस जांच के दायरे में India, China, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसे देश शामिल हैं। अमेरिका इन देशों की सरकारी सब्सिडी, कम मजदूरी दर, राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों की गतिविधियों और मुद्रा नीतियों की जांच करेगा।

बंधुआ मजदूरी पर भी सख्ती

अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े उत्पादों के आयात को रोकने के लिए एक अलग सेक्शन 301 जांच शुरू करने की भी घोषणा की है। इस जांच के दायरे में 60 से अधिक देश आ सकते हैं। वाशिंगटन पहले ही चीन के Xinjiang क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य उत्पादों पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिका का आरोप है कि यहां उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को जबरन श्रम शिविरों में काम कराया जाता है, हालांकि चीन इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।

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भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस जांच में भारत की व्यापारिक नीतियां अमेरिकी मानकों के अनुसार अनुचित पाई जाती हैं, तो भारतीय उत्पादों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिका में भारतीय सामान महंगे हो सकते हैं, जिससे देश के निर्यातकों और विनिर्माण क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

इसी बीच कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent के नेतृत्व में अमेरिकी अधिकारी इस सप्ताह पेरिस में चीनी अधिकारियों से मुलाकात करने वाले हैं। माना जा रहा है कि यह बैठक जल्द होने वाली ट्रंप और Xi Jinping की संभावित मुलाकात से पहले महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Location : 
  • Washington

Published : 
  • 12 March 2026, 9:30 AM IST

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